लखनऊ: उत्तर प्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक पहचान अब केवल पारंपरिक उद्योगों और कुटीर शिल्प तक सीमित नहीं रह गई है। राज्य के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में स्थापित और विकसित हुए आठ स्टार्टअप आज 1 अरब डॉलर (लगभग 8,900 करोड़ रुपये) से अधिक के मूल्यांकन के साथ 'यूनिकॉर्न' क्लब में शामिल हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त एक अन्य उभरती हुई कंपनी जल्द ही इस मुकाम को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसे 'सूनिकॉर्न' की श्रेणी में रखा गया है।
पेटीएम से लेकर फिजिक्सवाला तक: इन दिग्गजों ने बनाई वैश्विक पहचान
राज्य से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख जमाने वाली कंपनियों में वित्तीय-तकनीक (FinTech) से लेकर शिक्षा और ई-कॉमर्स क्षेत्र के बड़े नाम शामिल हैं। वर्ष 2000 में शुरू हुआ डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म 'पेटीएम' और यूट्यूब से सफर शुरू करने वाला 'फिजिक्सवाला' आज अपने-अपने क्षेत्रों के अग्रणी मंच बन चुके हैं। इनके अलावा डिजिटल मर्चेंट कॉमर्स क्षेत्र की 'पाइनलैब्स', डिजिटल भर्ती व सूचना क्षेत्र की दिग्गज 'इंफोएज' (नौकरी डॉट कॉम), बी2बी ई-कॉमर्स की 'मॉजलिक्स', ऑनलाइन व्यापारिक नेटवर्क 'इंडियामार्ट', स्वास्थ्य-तकनीक क्षेत्र की 'इनोवेसर' और हॉस्पिटैलिटी सॉफ्टवेयर कंपनी 'रेटगेन' इस सूची में प्रमुखता से शामिल हैं। वहीं 'रैफे एमफिन' तेजी से यूनिकॉर्न बनने की ओर अग्रसर है।
2017 के बाद बदला परिदृश्य, सभी 75 जिलों तक पहुंचा नेटवर्क
उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति का प्रसार अभूतपूर्व गति से हुआ है। वर्ष 2017 से पूर्व जहां प्रदेश में मात्र 120 पंजीकृत स्टार्टअप मौजूद थे, वहीं आज इनकी संख्या बढ़कर 24,000 से अधिक हो चुकी है। इस शानदार प्रगति के साथ उत्तर प्रदेश अब भारत का चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। वर्तमान में राज्य के सभी 75 जिलों में कम से कम एक स्टार्टअप सक्रिय रूप से संचालित हो रहा है, जो स्थानीय युवाओं को रोजगार और नवाचार के अवसर प्रदान कर रहा है।
भविष्य की तकनीक और नई नीतियों पर सरकार का फोकस
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार के अनुसार, प्रदेश की प्रगतिशील 'स्टार्टअप नीति' के माध्यम से निवेशकों और उद्यमियों को वित्तीय प्रोत्साहन व अनुकूल व्यावसायिक माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का आगामी लक्ष्य राज्य के स्टार्टअप्स को वैश्विक पटल पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसके लिए आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप-टेक, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा निर्माण और स्वास्थ्य-तकनीक (HealthTech) जैसे उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नए स्टार्टअप्स को विशेष सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

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