नाग पंचमी का पर्व हिंदू धर्म में नाग देवता की पूजा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है. सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है. इस बार यह शुभ तिथि 17 अगस्त दिन सोमवार को है. 17 अगस्त को नाग पंचमी के साथ सावन के तीसरे सोमवार का व्रत भी किया जाएगा. सावन सोमवार व्रत के साथ नाग पंचमी का पर्व होना बेहद दुर्लभ संयोग है और ऐसा संयोग 23 साल बाद बन रहा है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि नाग पंचमी के दिन क्या सच में जीवित सांप या नाग की पूजा करनी चाहिए?
नाग पंचमी 2026
पंचमी तिथि की शुरुआत – 16 अगस्त, शाम 4 बजकर 52 मिनट से
पंचमी तिथि का समापन – 17 अगस्त, शाम 5 बजे तक
उदिया तिथि के आधार पर नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा.
नाग पंचमी 2026 पूजा का समय
शुभ पूजा मुहूर्त: सुबह 5:51 बजे से 8:29 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:24 से 5:08 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 से दोपहर 12:51 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 12:03 बजे से 12:47 बजे तक
इस तरह होती है नाग पंचमी की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता का पूजन जीवित सांप को पकड़कर या उसके साथ किसी तरह का व्यवहार करके नहीं, बल्कि प्रतीक रूप में करना अधिक उचित माना जाता है. घर या मंदिर में नाग देवता की प्रतिमा, चित्र या मिट्टी से बनी आकृति की पूजा की जा सकती है. हर घर में अपने बुजुर्गों की परंपराओं के अनुसार नाग पंचमी की पूजा की जाती है लेकिन कहीं भी जीवित नाग की पूजा करने का विधान नहीं है. कई जगहों पर घर के बाहर गोबर से सांप की आकृति बनाकर पूजा की जाती है, वहीं कुछ जगहों पर नाग पंचमी का चित्र लगाकर पूजा की जाती है.
नाग पंचमी के दिन सांप को दूध
नाग पंचमी के दिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी सांप को दूध ना पिलाएं, ऐसा करना गलत है. शास्त्रों जीवित सांप को दूध पिलाना वर्जित बताया गया है. जीवित सांप को दूध पिलाने या उसके साथ भीड़ जुटाकर पूजा करने की परंपरा से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सांप और इंसान दोनों के लिए खतरा हो सकता है. सांपों को दूध पिलाना भी उनके प्राकृतिक आहार का हिस्सा नहीं है और इससे उन्हें नुकसान पहुंच सकता है. सांप को दूध पिलाकर आप पुण्य की जगह पाप के भागीदार बन जाते हैं.
नाग पंचमी पर क्यों नहीं खोदते भूमि?
नाग पंचमी के दिन भूमि खोदने की मनाही के पीछे धार्मिक और लोक मान्यताएं जुड़ी हैं. मान्यता है कि वर्षा ऋतु में सांप और दूसरे जीव-जंतु जमीन के भीतर बने बिलों या सुरक्षित स्थानों में रहते हैं. ऐसे समय जमीन खोदने से उनके आवास को नुकसान पहुंच सकता है और जीवों को चोट लगने की आशंका रहती है. इसी कारण इस दिन हल चलाने, खेत खोदने या अनावश्यक रूप से भूमि की खुदाई करने से बचने की परंपरा बनी. धार्मिक दृष्टि से भी नाग पंचमी को नाग देवता की आराधना और जीव-जंतुओं के संरक्षण का दिन माना जाता है. इसलिए इस दिन जीवित नाग को परेशान करने के बजाय श्रद्धा से नाग देवता की प्रतिमा या चित्र का पूजन करना और प्रकृति व जीवों के प्रति करुणा रखना ही इस पर्व की भावना के अनुरूप माना जाता है.

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