मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में सफर करने वाले आम लोगों के लिए आज की सुबह महंगाई का नया झटका लेकर आई है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इस वृद्धि के बाद मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई जैसे प्रमुख इलाकों में सीएनजी के दाम 82 रुपये से बढ़कर अब 84 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। ईंधन की कीमतों में अचानक हुए इस इजाफे ने न केवल निजी वाहन मालिकों बल्कि सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहने वाली एक बड़ी आबादी की चिंता बढ़ा दी है।
किराया बढ़ाने की तैयारी में जुटे ऑटो-टैक्सी यूनियन
सीएनजी के दाम बढ़ते ही मुंबई की लाइफलाइन कहे जाने वाले ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। परिवहन यूनियनों का तर्क है कि ईंधन की कीमतों के साथ-साथ वाहनों के स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस लागत में भी भारी वृद्धि हुई है, जिससे पुराने किराए पर गाड़ी चलाना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। ऑटो चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि न्यूनतम किराए में कम से कम 1 रुपये की वृद्धि की जाए। यूनियनों का कहना है कि यदि सरकार जल्द ही किराए में संशोधन नहीं करती है, तो उनके लिए अपनी आजीविका चलाना मुश्किल हो जाएगा।
महंगाई की दोहरी मार से यात्री बेहाल
दूसरी ओर, इस संभावित किराया वृद्धि की खबर ने रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों के माथे पर बल ला दिए हैं। यात्रियों का कहना है कि पहले से ही खाद्य वस्तुओं और बिजली के दामों ने घर का बजट बिगाड़ रखा है, और अब परिवहन के महंगे होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। लोगों को डर है कि ऑटो और टैक्सी के न्यूनतम किराए में बढ़ोतरी का असर उनकी मासिक बचत पर पड़ेगा। विशेषकर उन इलाकों में जहां बस कनेक्टिविटी कम है और लोग पूरी तरह ऑटो पर निर्भर हैं, वहां यात्रियों को ज्यादा आर्थिक बोझ झेलना पड़ सकता है।
प्रशासन के फैसले पर टिकी सबकी नजरें
हालांकि, सीएनजी की कीमतों में बदलाव के बावजूद परिवहन किराए में कोई भी आधिकारिक बढ़ोतरी तब तक नहीं होगी, जब तक परिवहन विभाग और संबंधित प्राधिकरण इसे अपनी मंजूरी नहीं दे देते। प्रशासन फिलहाल स्थिति का आकलन कर रहा है और यूनियनों की मांगों पर विचार करने की बात कह रहा है। लेकिन जानकारों का मानना है कि सीएनजी की बढ़ी हुई दरों को देखते हुए आने वाले दिनों में किराए में मामूली वृद्धि को टालना मुश्किल होगा। फिलहाल, मुंबई और आसपास के शहरों में बढ़ती परिवहन लागत ने महंगाई के मुद्दे पर एक नई बहस छेड़ दी है।

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