October 25, 2026

वायरल वीडियो के बाद संजय दुबे का स्पष्टीकरण, बोले- गलती जितनी बड़ी, कार्रवाई उतनी सख्त

भोपाल। नगरीय निकायों में अधिकारियों द्वारा खरीदारी के नाम पर की जाने वाली गड़बड़ियों और मनमानी को लेकर शहरी विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे का एक वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में वे अधिकारियों को साफ लहजे में हिदायत और चेतावनियां देते हुए नजर आ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम और अपने कड़े बयानों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि यह वीडियो अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण सत्र के दौरान का है, जहां उन्हें नियमों का सख्ती से पालन करने और शासन की छवि को बेहतर बनाए रखने की सीख दी जा रही थी।

प्रशिक्षण सत्र का वीडियो और निगरानी की व्यवस्था

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि विभाग द्वारा हर छह महीने में नगरीय निकायों के अधिकारियों के साथ समीक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान अधिकारियों को यह स्पष्ट रूप से समझाया जा रहा था कि मुख्यालय स्तर से उनकी हर गतिविधि की निगरानी किस तरह की जाती है। उन्होंने कहा कि अर्बन लोकल बॉडीज के पास अपने आय के स्रोत और बजट होते हैं, साथ ही राज्य शासन की ओर से भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। आधुनिक तकनीक का उपयोग किए बिना इतने बड़े स्तर पर बजट और खर्चों की पारदर्शी ट्रैकिंग संभव नहीं है।

जेम और ई-नगरपालिका पोर्टल से अनिवार्य खरीदी

वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने डिजिटल तकनीकों का सहारा लिया है। प्रशासनिक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि निकायों में होने वाला हर बिलिंग कार्य केवल ई-नगरपालिका पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त किसी भी सामग्री या सेवा की खरीदारी के लिए जेम पोर्टल का उपयोग अनिवार्य बना दिया गया है। विभाग में प्रतिदिन औसतन एक से डेढ़ हजार ऑर्डर जारी होते हैं, जिनमें पांच रुपये की छोटी खरीदारी से लेकर पांच सौ करोड़ रुपये तक के बड़े टेंडरों का विश्लेषण कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक के जरिए बारीकी से किया जा रहा है।

लापरवाही पर भारी भरकम जुर्माना और सख्त कार्रवाई

सफाई के दौरान एसीएस ने विभाग द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों का लेखा-जोखा भी पेश किया। उन्होंने बताया कि समीक्षा के दौरान अनियमितता और लापरवाही बरतने वाले तीन सौ से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर दंडात्मक कदम उठाए गए हैं, जिनमें सौ से अधिक सीएमओ स्तर के अधिकारी शामिल हैं। गंभीर मामलों में सात अफसरों को सेवा से बर्खास्त तक कर दिया गया है। इसके अलावा गड़बड़ी करने वाले दर्जनों ठेकेदारों व सप्लायरों को ब्लैकलिस्ट किया गया है और दोषियों से करोड़ों रुपये की वसूली की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही का दायरा जितना बड़ा होगा, कार्रवाई भी उतनी ही कठोर होगी।