वाराणसी। धनतेरस और प्रकाश पर्व दीपावली के शुभ अवसर पर धर्मनगरी काशी का सराफा बाजार रोशनी और अभूतपूर्व चमक से दमक उठा है। इस वर्ष पारंपरिक चांदी के सिक्कों, बर्तनों और पूजा सामग्री के साथ-साथ चांदी से निर्मित कलात्मक आकृतियों का जबरदस्त आकर्षण देखने को मिल रहा है। धर्म और वास्तु शास्त्र में अत्यंत शुभ माने जाने वाले 10 ग्राम वजन के चांदी के हाथी, कछुए और मछली की मांग इतनी अधिक बढ़ गई है कि लगभग दो क्विंटल वजनी ऐसी कलाकृतियां चंदौली, मिर्जापुर, जौनपुर सहित पूर्वांचल के 10 जिलों के अलावा बिहार और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में आपूर्ति की गई हैं।
पूर्वांचल और पड़ोसी राज्यों से भारी एडवांस बुकिंग
वाराणसी के चौक, ठठेरी बाजार, गोविंदपुरा तथा रेशम कटरा जैसे ऐतिहासिक सराफा बाजारों में सुबह से ही ग्राहकों और थोक व्यापारियों की चहल-पहल देखी जा रही है। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया और मिर्जापुर के थोक विक्रेताओं ने 10 दिन पूर्व ही इन विशेष कलाकृतियों के ऑर्डर बुक करा लिए थे। हालांकि, मांग में बेतहाशा वृद्धि और सीमित आपूर्ति के चलते कई पुराने ऑर्डर समय पर पूरे करने में कठिनाई आई। स्थानीय कारीगरों पर काम का अत्यधिक दबाव रहने के कारण तैयार माल बाजार में पहुंचते ही हाथों-हाथ बिक गया।
वास्तु शास्त्र और शुभता का प्रतीक बनीं चांदी की आकृतियां
सराफा कारोबारियों का कहना है कि धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश की मूर्तियों व सिक्कों के साथ-साथ लोग सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में 10-10 ग्राम के चांदी के कछुए (जो स्थिरता और दीर्घायु का प्रतीक हैं), मछली (जो धन प्रवाह दर्शाती है) और हाथी (जो ऐश्वर्य का प्रतीक है) की खरीदारी कर रहे हैं। इन आकृतियों को लोग अपनी तिजोरियों और पूजा स्थलों में स्थापित करने के लिए प्राथमिकता दे रहे हैं। छोटा आकार और किफायती वजन होने के कारण यह त्योहारी उपहार देने के लिए भी ग्राहकों के बजट में पूरी तरह अनुकूल साबित हो रहे हैं।
चांदी के दामों में उथल-पुथल से सराफा बाजार में अनिश्चितता
त्योहारी सीजन के दौरान चांदी की कीमतों में अचानक आई तेजी से बाजार में गहमागहमी का माहौल बना रहा। बीते दिनों गिरावट के बाद अचानक भाव में हुई भारी बढ़ोतरी के कारण थोक और खुदरा व्यापारी नए सौदे तय करने में सतर्कता बरतते नजर आए। कुछ व्यापारियों ने दाम और चढ़ने की उम्मीद में माल को थामे रखा, वहीं दूसरी ओर आम ग्राहक दरों में उतार-चढ़ाव के बीच जल्द से जल्द अपनी खरीदारी पूरी करने की होड़ में लगे रहे। वाराणसी सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस धनतेरस पर चांदी की इन विशेष धार्मिक व वास्तु आकृतियों का नया ट्रेंड देखने को मिला है, जिसकी मांग पड़ोसी राज्यों में भी व्यापक रूप से बनी हुई है।

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