नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने एक बयान में एसआईआर प्रक्रिया का खुलकर समर्थन करते हुए विपक्षी दलों को नसीहत दी है। उन्होंने मतदाता सूची में सुधार को जरूरी बताते हुए युवाओं को गुमराह करने वाली देशी और विदेशी ताकतों को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है।
युवाओं को भड़काने की हो रही साजिश
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन-जी के विरोध प्रदर्शन के सवाल पर होसबाले ने कहा कि देश के भीतर और बाहर कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हैं जो लगातार युवाओं को उकसाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज और सरकार दोनों को युवाओं की चिंताओं और अपेक्षाओं को ध्यान से सुनना चाहिए।
चुनावी प्रक्रिया से ही संभव है सत्ता परिवर्तन
होसबाले ने कहा कि व्यवस्था के प्रति युवाओं में असंतोष स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इसका गलत इस्तेमाल करते हैं। आरएसएस इस तरह की प्रवृत्तियों का कड़ा विरोध करता है। भारत में सरकार बदलने का एकमात्र जरिया चुनाव है और सत्ता परिवर्तन के नाम पर देश में हिंसा या अशांति फैलाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
एसआईआर का बिना वजह विरोध ठीक नहीं
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध करने पर हैरानी जताते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने एजेंडे के तहत काम करने की छूट है, पर केवल विरोध के लिए विरोध करना गलत है। विपक्ष को पहले यह परखना चाहिए कि उठाए जा रहे सवालों में कितनी सच्चाई है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट की विसंगतियों को दूर करना है, जिसके तहत मृत व्यक्तियों या दो अलग-अलग जगहों पर दर्ज नामों को हटाया जाता है।
वोटर लिस्ट में गैर-नागरिकों का होना खतरनाक
उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग भारत के नागरिक नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूचियों में शामिल होना देश की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। सूचियों की समय-समय पर जांच पुरानी प्रक्रिया है। अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि यदि वह बंगलूरू में निवास करते हैं, तो उनका नाम पैतृक गांव की वोटर लिस्ट से हट जाना चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि तब भी इस तरह के सुधार हुए थे और किसी ने उस पर आपत्ति नहीं जताई थी।
ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि पर फिलहाल कोई नया आंदोलन नहीं
काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर बात करते हुए होसबाले ने स्पष्ट किया कि हर मामले के समाधान का तरीका अलग होता है। जो मामले अदालतों में विचाराधीन हैं, उनका फैसला न्यायपालिका के जरिए ही होना चाहिए। हर संवेदनशील मुद्दे पर सड़क पर उतरकर नया आंदोलन शुरू करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हिंदू समाज के लोग पहले से ही इन मामलों के समाधान के लिए प्रयास कर रहे हैं।

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