जयपुर। राजस्थान के बीकानेर में मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करने वाली एक और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां जीवन और मौत के बीच 36 दिनों तक संघर्ष करने के बाद आखिरकार एक 25 वर्षीय महिला कमला ने दम तोड़ दिया। बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल में सिजेरियन (सी-सेक्शन) डिलीवरी के तत्काल बाद से ही इस महिला की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी थी, जिसके बाद उसे सघन चिकित्सा में रखा गया था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
अस्पताल में सिजेरियन के बाद लगातार तीसरी मौत
चिकित्सीय लापरवाही और व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करने वाला यह पीबीएम अस्पताल का पिछले कुछ ही हफ्तों में तीसरा गंभीर मामला है, जिसमें सी-सेक्शन के बाद प्रसूता की जान गई है। इससे पहले बीते 19 जून को भी इसी तरह ऑपरेशन के बाद उपजी शारीरिक जटिलताओं के कारण 20 साल की प्रीति नामक युवती ने दम तोड़ा था, और इस खौफनाक घटना के महज दो दिन बाद ही 26 वर्षीय शारदा की भी इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जिससे अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
तीनों मामलों में एक जैसे गंभीर लक्षण
इन तीनों ही दर्दनाक मामलों में एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली समानता देखने को मिली है, जहां डिलीवरी के महज 24 घंटे के भीतर ही तीनों महिलाओं के गुर्दों ने काम करना बंद कर दिया था और उन्हें यूरिन आना पूरी तरह बंद हो गया था। मृतका शारदा के मामले में तो स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि उसकी किडनी फेल होने के बाद उसे कई बार डायलिसिस पर भी रखा गया, लेकिन शरीर में कोई सुधार न होने के कारण उसने दम तोड़ दिया, जो चिकित्सा प्रणाली पर गहरे सवालिया निशान लगाता है।
ऑपरेशन के बाद कई अंगों ने काम करना किया बंद
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार मृतका कमला को बीते 8 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसी दिन उसका सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था, क्योंकि वह मधुमेह से पीड़ित थी और पहले भी उसकी दो सिजेरियन डिलीवरी हो चुकी थीं। ऑपरेशन के अगले ही दिन 9 जून को कमला की हालत बिगड़ने के बाद उसे वेंटिलेटर और डायलिसिस पर लिया गया था, जहां थोड़े सुधार के बाद टांकों की दोबारा सर्जरी करनी पड़ी, लेकिन इस दूसरी प्रक्रिया के बाद उसके शरीर के कई मुख्य अंगों ने काम करना बंद कर दिया जो अंततः उसकी मौत का कारण बना।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रसूताओं की मौत के आंकड़े
राजस्थान में पिछले तीन महीनों के भीतर प्रसूताओं की मौत का यह सिलसिला बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है, जिसके आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की चिंताओं को बढ़ाने वाले हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार हालिया महीनों में प्रसूति के दौरान होने वाली मौतों में से 5 मामले कोटा में, 3 बीकानेर में और 2 जोधपुर में सामने आए हैं, जबकि भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों को मिलाकर कुल 9 महिलाओं की जान जा चुकी है, जो राज्य में मातृ स्वास्थ्य सुरक्षा की जमीनी हकीकत को बयां करती है।

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