रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा से भारतीय जनता पार्टी के सांसद जनार्दन मिश्रा के बेटे अंकुर मिश्रा इन दिनों सरपंच पद के एक उपचुनाव को लेकर खासी सुर्खियों में आ गए हैं। खास बात यह है कि एक सांसद का पुत्र होने के बावजूद अंकुर जमीनी स्तर पर सरपंच पद के लिए चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं, लेकिन उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच उन्होंने अपने परिवार और राजनीतिक जीवन से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
खुद को आम आदमी बताकर लड़ रहे हैं चुनाव
जब मीडिया ने अंकुर मिश्रा से सवाल किया कि जब एक सांसद पुत्र की ही सुनवाई नहीं हो रही है, तो आम आदमी क्या उम्मीद रख सकता है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें सांसद पुत्र के रूप में न देखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पूरी तरह से एक आम आदमी की तरह यह लड़ाई लड़ रहे हैं। अंकुर का कहना है कि यदि वे केवल 'सांसद पुत्र' होते, तो शायद उन्हें सरपंच पद का उपचुनाव लड़ने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही एक सामान्य पोलिंग बूथ तक पहुंचने के लिए इस तरह संघर्ष करना पड़ता। उन्होंने खुद को तानाशाहों के खिलाफ लड़ने वाला एक आम नागरिक बताया।
पिता ने घर से निकाला, प्रचार से भी दूरी
अंकुर मिश्रा ने खुलकर इस बात का जिक्र किया कि इस राजनीतिक कदम के चलते उनके पिता और सांसद जनार्दन मिश्रा उनसे नाराज हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया है और यहां तक कि उनके पिता इस चुनाव में प्रचार-प्रसार के लिए भी नजर नहीं आएंगे। अंकुर के मुताबिक, पिता जनार्दन मिश्रा ने उन्हें साफ शब्दों में कहा है कि यदि उन्होंने समाज और देश के लिए अपने दम पर कदम उठाया है, तो उन्हें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी।
सांसद पुत्र ने यह भी साझा किया कि उन्होंने अपने पैतृक घर से कपड़े मंगवाए थे और वे घर के बाहर ही खड़े नजर आए थे। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि पिता होने के नाते वे शायद कभी न कभी उन्हें जरूर माफ कर देंगे। उन्होंने बताया कि उनके पिता वर्तमान में स्वास्थ्य कारणों से बीमार हैं और दिल्ली में हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि उनके भाई से उन्हें उम्मीद है कि वे चुनाव प्रचार में जरूर सहयोग करेंगे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और वैचारिक दूरियां
अंकुर मिश्रा ने बताया कि उनके पिता जनार्दन मिश्रा ने सांसद बनने के बाद से ही उन्हें हमेशा एक सामान्य और साधारण जीवन जीने की सीख दी थी। यही वजह है कि वे आज भी बेहद साधारण जीवनशैली अपनाते हैं और साइकिल से चलते हैं। फिलहाल, अंकुर मिश्रा का अपने पिता से राजनीतिक या व्यक्तिगत तौर पर कोई सीधा वास्ता नहीं बचा है। आने वाले समय में परिस्थितियां क्या मोड़ लेती हैं, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन रीवा सांसद के बेटे का इस तरह सरपंच पद के चुनाव में उतरना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।

More Stories
डायल-112 के WhatsApp पर CM मोहन यादव को धमकी, क्राइम ब्रांच ने मुंबई से आरोपी पकड़ा
डीजे की तेज आवाज के बीच गणेश दर्शन, बैतूल में छात्रा की अचानक मौत से मचा हड़कंप
खंडवा में विसर्जन के दौरान दो भाई डूबे, 5 घंटे की तलाश के बाद बरामद हुए शव