1400 साल पुराना राजस्थान का काशी विश्वनाथ मंदिर, जहां हार गया था मोहम्मद गौरी

श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. देश में बारह ज्योतिर्लिंग में से एक काशी विश्वनाथ मन्दिर यूपी के बनारस में है, लेकिन सिरोही जिले में भी एक काशी विश्वनाथ मंदिर 12वीं शताब्दी में बना था. आज भी इस मंदिर में सैकड़ों भक्त दर्शन करने आते हैं. मंदिर को मुगल आक्रांताओं के हमले में खंडित कर दिया गया था.  सिरोही जिले में अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में बसे कासिंद्रा गांव में करीब 1400 वर्ष पुराना काशी विश्वनाथ मंदिर है.

गंभीरी नदी के किनारे बने इस मंदिर के सुंदर घाट, प्राचीन प्रतिमाएं और इस मंदिर की सुंदर बनावट यहां आने वाले भक्तों को काफी पसंद आती है. स्थानीय भक्त गणपत सिंह ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था. 17वीं शताब्दी में मंदिर का विस्तार और जीर्णोद्धार करवाया गया था. श्रावण मास में यहां जिले भर से भक्त दर्शन करने आते है.
मंदिर में विराजमान है दो सांप वाले शिवलिंग
इस मंदिर के गर्भ गृह में दो सांपों के साथ विशाल शिवलिंग विराजमान है. मंदिर में सुंदर नक्काशी के साथ कई प्रतिमाएं भी बनी हुई है. यहां सैकड़ों वर्ष पुरानी कई प्राचीन और खंडित देव प्रतिमाएं भी है. जो इस मंदिर के इतिहास को बयां करती है. यह मंदिर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर ही बनाया गया था, इस वजह से इसे इसी नाम से पहचाना जाता है.

भीषण युद्ध में मोहम्मद गौरी की हुई थी हार
कासिंद्र गांव में हुए एक भीषण युद्ध में मोहम्मद गौरी और उसकी सेना को गुजरात की रानी नायिका देवी से हार झेलनी पड़ी थी. स्थानीय लोगों के मुताबिक मोहम्मद गौरी अपनी सेना के साथ मोहम्मद गौरी नाडोल के किले पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के बाद पूरे शहर को लूटकर कर रास्ते में आने वाले मंदिरों को लूटते हुए गुजरात की तरफ जा रहा था. तब रास्ते में काशिंद्रा के इस मंदिर को भी लूटने की नियत से सेना ने खंडित कर दिया था.
जब इसकी सूचना गुजरात की चालुक्य सोलंकी राजवंश की राजमाता नायिका देवी को मिली, तो उनके नेतृत्व में नाडोल के केल्हण चौहान, उनके भाई और जालौर के शासक कीर्तिपाल, और आबू के परमार शासक धारावर्ष ने मिलकर कासिंद्रा में मोहम्मद गौरी की सेना पर हमला कर दिया था. इस युद्ध में गौरी की सेना को हार का सामना करते हुए जान बचाकर भागना पड़ा था