मुंबई| महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने शनिवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा बेहद आपत्तिजनक थी। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि प्रधानमंत्री को अपनी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी दूसरों के खिलाफ ऐसी ही अपमानजनक व घटिया भाषा का इस्तेमाल करने से रोकने की सख्त सलाह देनी चाहिए।
राज ठाकरे मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना (MNVS) के 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में किसी भी राजनीतिक व्यक्ति या आम नागरिक के खिलाफ इस तरह की आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कतई नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शालीनता और मर्यादा का यह नियम सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से और बिना किसी भेदभाव के लागू होना चाहिए।
'पीएम मोदी के खिलाफ भाषा गलत थी, लेकिन अपनी पार्टी के लोगों को भी समझाएं'
राज ठाकरे ने कहा, "जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह पूरी तरह से गलत था। हम सब इस बात से पूरी तरह सहमत हैं। मैं 100 फीसदी इस बात को मानता हूँ कि किसी के भी खिलाफ इस तरह की घटिया भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही मैं प्रधानमंत्री से सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूँ कि वे अपनी पार्टी के लोगों को भी यह बात ठीक से समझाएं।"
मनसे प्रमुख का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुक्रवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश के तुरंत बाद सामने आया है। उस वीडियो में प्रधानमंत्री ने जंतर-मंतर पर उनके और उनकी पूजनीय माताजी के खिलाफ इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर अपनी गहरी आपत्ति जताई थी। हालांकि, बड़े दिल का परिचय देते हुए पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि वे इस पूरे घटनाक्रम में शामिल युवाओं को माफ करते हैं और उन्होंने यह अपील भी की थी कि उन छात्र-युवाओं के खिलाफ कोई कठोर कानूनी कार्रवाई न की जाए।
राज ठाकरे का बीजेपी और ट्रोल आर्मी पर तीखा हमला
पिछले 12 वर्षों की राजनीतिक संस्कृति पर कड़े सवाल उठाते हुए मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आक्रामक रूप से ऑनलाइन ट्रोलिंग और अभद्र भाषा को बढ़ावा देने का सीधा आरोप लगाया।
ठाकरे ने अपनी बात रखते हुए कहा, "आपकी यह डिजिटल ट्रोल टीम देश के महान नायकों—महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी से लेकर हम सभी विपक्षी नेताओं के खिलाफ जिस तरह की गंदी भाषा का इस्तेमाल करती है, उसे जरा उठाकर देखिए। आज स्थिति यह है कि महाराष्ट्र के कई जाने-माने कलाकार खुलकर अपनी बात रखने से भी डरने लगे हैं। देश के लगभग हर राज्य में ऐसी ट्रोल आर्मी तैयार की गई है। प्रधानमंत्री जी, आपको अपनी पार्टी के इन लोगों से भी यह कहना चाहिए कि वे आम नागरिकों को अपशब्द कहना बंद करें।"
उन्होंने आगे तल्ख अंदाज में कहा कि यह जहरीली ट्रोल संस्कृति पिछले 12 सालों में ही शुरू हुई है। जैसा बोया जाता है, वैसा ही काटना पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने बिल्कुल सही कहा कि उनके और उनकी बुजुर्ग माताजी के खिलाफ अपशब्द कहे गए, जो कि निश्चित तौर पर बेहद निंदनीय है। लेकिन मेरा प्रधानमंत्री से विनम्र अनुरोध है कि दूसरों की भी माताएं होती हैं। आपको अपनी पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं के लिए भी शालीनता की कुछ सीमाएं तय करनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि आप यह कहते हैं कि आपने जंतर-मंतर वाले नासमझ युवाओं को माफ कर दिया है, लेकिन पिछले 12 वर्षों से आपके लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर जो कुचक्र चलाया जा रहा है, उसके लिए देश से कौन माफी मांगेगा?
'जेन-जी' (Gen-Z) की मानसिकता को समझने की जरूरत
आज की युवा पीढ़ी के मुद्दों पर बात करते हुए मनसे प्रमुख ने अपनी पार्टी की छात्र इकाई को बदलते वक्त के साथ खुद को अपडेट करने और आज की नई पीढ़ी (जेन-जी) की प्राथमिकताओं और जरूरतों को गहराई से समझने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, "जब मैं खुद छात्र था, तब राजनीति और समाज के मुद्दे बिल्कुल अलग हुआ करते थे। आज के विषय, आज के हालात और आज के युवा पूरी तरह से अलग हैं। हमने टेलीग्राम के जमाने से लेकर इंस्टाग्राम और एआई (AI) तक का पूरा दौर अपनी आंखों से देखा है। हमें यह भली-भांति समझना होगा कि यह 'जेनरेशन जेड' (Gen-Z) असल में चाहती क्या है। आज महाराष्ट्र के छोटे-छोटे गांवों और कस्बों में भी जेन-जी मौजूद है। उनकी उम्मीदों और आकांक्षाओं को समझना सबसे ज्यादा जरूरी है, और मनसे की छात्र इकाई को इसी दिशा में आगे बढ़कर काम करना होगा।"
शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल के बयान पर कसा जोरदार तंज
दिल्ली की हालिया घटनाओं और उससे जुड़ी जांच को लेकर महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल द्वारा दिए गए बयानों पर राज ठाकरे ने बेहद तीखा और हास्यप्रद तंज कसा। मंत्री की एक टिप्पणी पर चुटकी लेते हुए ठाकरे ने मजाकिया लहजे में कहा, "बचपन में हमारे बुजुर्ग और माता-पिता हमसे कहा करते थे कि सोने से जाने से पहले सिर में रोजाना तेल लगाया करो, इससे बुद्धि और दिमाग तेज होता है। लेकिन लगता है कि एक व्यक्ति ने अपनी पूरी जिंदगी बालों में तेल लगाने में ही बिता दी, फिर भी उनके हिस्से में बुद्धि नहीं आ पाई।"
उन्होंने कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा, "क्या हमारे राज्य के शिक्षा और तकनीकी मंत्री को इस बात की जरा भी समझ है कि वे मीडिया के सामने क्या बोल रहे हैं? आज पूरी दुनिया विज्ञान और तकनीक के मामले में किस दिशा में आगे निकल रही है और हमारे मंत्री किस बेतुकी बात के बारे में चर्चा कर रहे हैं? महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री जी घटनास्थल पर मिले पत्थरों के फिंगरप्रिंट्स को आधार कार्ड से जोड़ना चाहते हैं! मैं तो यह देखना चाहता हूँ कि खुद चंद्रकांत पाटिल के दिमाग के भीतर फिंगरप्रिंट्स हैं या नहीं।"
राज ठाकरे ने अंत में तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कोल्हापुर के लोगों ने उन्हें पुणे भेजा था, शायद इसलिए कि वहां जाकर उनकी समझ और बुद्धि का दायरा थोड़ा और बढ़ेगा, लेकिन यहां आने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि राज्य में इस स्तर का शिक्षा मंत्री बैठा होगा, तो क्या आज की संवेदनशील जेन-जी पीढ़ी अपना आपा नहीं खोएगी?

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