जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सरकारी सेवा से इस्तीफा देने वाले एक पूर्व रेलवे कर्मचारी को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने इस्तीफा वापस लेकर दोबारा सेवा में बहाल किए जाने की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायालय का कहना है कि चुनाव में हार मिलने के बाद इस्तीफा वापस लेने के लिए कोई भी अपरिहार्य या बाध्यकारी कानूनी परिस्थिति मौजूद नहीं थी।
क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ता नीरज बिश्नोई उत्तर पश्चिम रेलवे में सीनियर ऑडिटर के पद पर कार्यरत थे। राजस्थान विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने के लिए उन्होंने 10 अक्टूबर 2023 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे विभाग ने 1 नवंबर 2023 को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर रतनगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनाव हारने के बाद उन्होंने 1 जनवरी 2024 को विभाग को आवेदन देकर अपना इस्तीफा वापस लेने और सेवा में पुनर्बहाली की गुहार लगाई, जिसे रेलवे विभाग ने ठुकरा दिया था। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) और फिर हाईकोर्ट का रुख किया था।
अदालत में याचिकाकर्ता के तर्क और हाईकोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उनका आवेदन 90 दिन की निर्धारित समयावधि के भीतर दिया गया था। साथ ही यह तर्क भी दिया गया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उन्हें पेंशन संबंधी लाभ नहीं मिल पाएंगे, और इसी कानूनी स्थिति का पता चलने के बाद उन्होंने इस्तीफा वापस लेने का फैसला किया था।
स्वेच्छा से दिया गया था इस्तीफा
न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह और न्यायाधीश संदीप तनेजा की खंडपीठ ने इन तर्कों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने पूरी तरह स्वेच्छा से अपने पद से त्यागपत्र दिया था। अदालत ने कहा कि केवल यह जानकारी सामने आना कि अब पेंशन लाभ नहीं मिलेंगे, इस्तीफा वापस लेने के लिए कोई वैध या अनिवार्य कारण नहीं माना जा सकता।
राजनीतिक निष्पक्षता और तटस्थता का मुद्दा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर भी जोर दिया कि सरकारी कर्मचारियों के लिए हर समय अपनी राजनीतिक निष्पक्षता और तटस्थता बनाए रखना अनिवार्य है, क्योंकि सेवा नियम उन्हें किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति नहीं देते। चूंकि याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ा था, इसलिए वे तटस्थ नहीं रहे। इन तमाम बिंदुओं के आधार पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) जयपुर द्वारा 27 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और नीरज बिश्नोई की रिट याचिका को पूरी तरह सारहीन मानते हुए खारिज कर दिया।

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