November 3, 2026

ऑनलाइन शॉपिंग में ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा, बिना पूछे नहीं काट सकेंगी कंपनियां पैसे

नई दिल्ली। ऑनलाइन टिकटों की बुकिंग कराने अथवा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से खरीदारी करते समय ग्राहकों के बिल में दान या चैरिटी के नाम पर 1 रुपये से लेकर 10 रुपये तक की अतिरिक्त राशि चुपके से जोड़ दिए जाने के खेल पर अब सरकार पूरी तरह सख्त हो गई है। छोटी रकम होने के चलते आम उपभोक्ता अक्सर इस मामूली बढ़ोतरी पर गौर नहीं करते, परंतु डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की इस मनमानी और छिपी हुई कार्यप्रणाली पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

'बास्केट स्नीकिंग' की आड़ में मनमानी वसूली पर लगेगी लगाम

उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय ई-कॉमर्स कंपनियों की इस अनुचित व्यापारिक गतिविधि यानी 'बास्केट स्नीकिंग' को पूरी तरह बंद कराने के लिए कड़े नियम व विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, जिन्हें इस वर्ष दिसंबर तक आधिकारिक रूप से जारी कर दिया जाएगा। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, जिस प्रकार एयरलाइंस या बस सेवा प्रदाता कंपनियां पसंदीदा सीट के चयन के लिए शुल्क काटने से पूर्व ग्राहक की स्पष्ट स्वीकृति प्राप्त करती हैं, ठीक उसी तरह अब चैरिटी या अन्य सेवाओं के नाम पर पैसा वसूलने से पहले कंपनियों को स्पष्ट विकल्प प्रदान करना अनिवार्य होगा। उपभोक्ता की पूर्व मर्जी के बिना कोई भी ई-कॉमर्स कंपनी अपनी ओर से कोई अतिरिक्त शुल्क या दान की राशि बिल में नहीं जोड़ सकेगी।

क्या है बास्केट स्नीकिंग और किस तरह होती है उपभोक्ताओं से वसूली

ऑनलाइन खरीदारी अथवा बुकिंग के दौरान जब भुगतान का अंतिम चरण आता है, तब ग्राहक की जानकारी और स्पष्ट सहमति के बिना उसकी शॉपिंग कार्ट या बास्केट में अतिरिक्त वारंटी, दान, चैरिटी शुल्क अथवा अन्य कोई गुप्त सेवा या उत्पाद चुपचाप जोड़ दिए जाते हैं। उपभोक्ता जल्दबाजी या अनदेखी में इस छिपे हुए शुल्क के साथ ही कुल बिल का भुगतान कर देते हैं। इस भ्रामक और अनुचित प्रक्रिया के जरिए ऑनलाइन कंपनियां करोड़ों रुपये की अनुचित राशि एकत्र कर लेती हैं, जिसे तकनीकी भाषा में 'बास्केट स्नीकिंग' कहा जाता है। नए नियम लागू होने के पश्चात इस प्रकार की किसी भी गुप्त वसूली पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा।