चंडीगढ़। केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन कानून के लागू होने पर पंजाब की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नई व्यवस्था के तहत लोकसभा और विधानसभा सीटों में बढ़ोतरी के साथ राजनीतिक समीकरण भी बदलेंगे और दलों को नई रणनीति बनानी पड़ेगी। अनुमान है कि परिसीमन के बाद पंजाब में लोकसभा सीटों की संख्या 13 से बढ़कर 19 हो सकती है जबकि विधानसभा सीटें 117 से बढ़कर करीब 140 तक पहुंच सकती हैं। इसके चलते नए हलकों का गठन होगा और कई शहर व गांव अपने पुराने क्षेत्रों से बदल जाएंगे जिससे चुनावी गणित पर सीधा असर पड़ेगा।
सियासत भी गरमाई
इस मुद्दे पर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि परिसीमन किसी एक पार्टी के फायदे के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि या तो महिला आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर लागू किया जाए या सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ाई जाएं। मान ने आरोप लगाया कि जहां भाजपा मजबूत है वहां सीटें बढ़ाने और जहां कमजोर है वहां संख्या कम रखने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि परिसीमन निष्पक्ष होना चाहिए और इसके लिए आगामी जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जाना चाहिए। आप नेता मनीष सिसोदिया ने भी आरोप लगाया कि विधेयक की आड़ में सीटों की संरचना से छेड़छाड़ की जा रही है जो देश की जनसांख्यिकी के खिलाफ है। वहीं शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि इस कदम से सत्ता संतुलन हिंदी भाषी राज्यों की ओर झुक सकता है जिससे संघीय ढांचा कमजोर होगा। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन की कड़ी आलोचना की है।

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