विदेश नीति पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने सरकार को दी नसीहत

नई दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र की मोदी सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। मुख्य विपक्षी दल ने दावा किया कि वैश्विक पटल पर पड़ोसी देश पाकिस्तान एक बार फिर अपना प्रभाव मजबूत कर रहा है, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बन चुका है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने इस संबंध में एक विस्तृत बयान जारी कर पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रमों और इजरायल के प्रति सरकार के रुख पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

पाकिस्तान को लेकर जयराम रमेश का बड़ा दावा

जयराम रमेश ने भारत की पुरानी विदेश नीति की याद दिलाते हुए कहा कि साल 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के कारण भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग (Isolate) कर दिया था। हालांकि, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में वह मजबूत स्थिति अब बदलती हुई दिखाई दे रही है।

उन्होंने सरकार को आगाह करते हुए कहा, "पाकिस्तान अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर एक नया प्रभाव हासिल करता नजर आ रहा है। इसके साथ ही, चीन और पाकिस्तान की लगातार गहरी होती रणनीतिक व सैन्य भागीदारी भारत की विदेश नीति के सामने एक अत्यंत गंभीर भू-राजनीतिक (Geo-political) चुनौती बनकर उभरी है, जिससे निपटने में मौजूदा सरकार विफल रही है।"

अमेरिका-ईरान के बीच 'जिनेवा समझौते' का स्वागत

कांग्रेस नेता ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने की दिशा में हो रहे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को रोकने के लिए आगामी 19 जून को जिनेवा में होने वाला समझौता एक स्वागतयोग्य कदम है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस ऐतिहासिक समझौते की पूरी रूपरेखा और शर्तें अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं, जिस पर भारत सरकार को पैनी नजर रखनी चाहिए।

इजरायल के प्रति 'अंधभक्ति' छोड़ने की सलाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत विदेशी संबंधों पर निशाना साधते हुए जयराम रमेश ने कहा कि पीएम मोदी से इजरायल के प्रति अपने एकतरफा रुख पर पुनर्विचार की उम्मीद करना शायद बहुत ज्यादा होगा, लेकिन भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित हमेशा से एक संतुलित विदेश नीति की मांग करते आए हैं।

उन्होंने कहा, "मानवीय मूल्यों और भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति के अलावा भी देश का हित इसी में है कि सरकार इजरायल के प्रति अपनी 'अंधभक्ति' को तुरंत छोड़े। पश्चिम एशिया में भारत के करोड़ों नागरिक काम करते हैं और हमारे ऊर्जा हित वहां से जुड़े हैं, इसलिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय मामलों में अधिक व्यावहारिक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।"