श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)। श्रीनगर तथा केंद्र शासित प्रदेश की राजनीति में उस समय सरगर्मी तेज हो गई जब जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विधानसभा के भीतर राजनीतिक घमासान मच गया। इसी गरमागरम माहौल के बीच, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने नई दिल्ली में देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक उच्चस्तरीय मुलाकात की। यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय पर आयोजित हुई है जब वर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा विधानसभा में राज्य के दर्जे की बहाली से जुड़ा एक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसने सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पुराने राजनीतिक मतभेदों को एक बार फिर सतह पर ला खड़ा किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री के साथ सुरक्षा और विकास पर चर्चा
इस मुलाकात के दौरान जम्मू-कश्मीर की समग्र सुरक्षा स्थिति, कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कामकाज, विकास कार्यों और विधानसभा में चल रहे मौजूदा घटनाक्रम समेत जनता से जुड़े कई अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने केंद्र सरकार के समक्ष प्रदेश से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मामले रखे। शर्मा के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्षेत्र में शांति, विकास और समृद्धि बनाए रखने के प्रति केंद्र सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हुए इन महत्वपूर्ण मामलों में हरसंभव प्रशासनिक और वित्तीय सहयोग प्रदान करने का पूर्ण भरोसा दिलाया है।
तथापि, इस बैठक के राजनीतिक निहितार्थ केवल सुरक्षा और विकास तक ही सीमित नहीं माने जा रहे हैं। यह मुलाकात ठीक उस वक्त हुई है जब विधानसभा में राज्य के दर्जे की बहाली की मांग वाले प्रस्ताव में वर्ष 2000 के पुराने स्वायत्तता प्रस्ताव और नवंबर 2024 के प्रस्ताव के संदर्भों को शामिल किए जाने पर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है।
स्टेटहुड प्रस्ताव में वर्ष 2000 के ऑटोनॉमी जिक्र पर भड़की BJP
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में विधानसभा में जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल प्रभाव से बहाल किए जाने की मांग वाला एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में पूर्व काल में पारित किए गए कुछ अन्य विधानसभा प्रस्तावों का हवाला देते हुए भारत सरकार से राज्य का दर्जा पुनः दिए जाने का आग्रह किया गया है।
यहीं से विधानसभा की पूरी बहस ने एक नया और तीखा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। भाजपा का यह स्पष्ट और दृढ़ तर्क है कि राज्य के दर्जे की बहाली का विषय एक स्वतंत्र संवैधानिक और प्रशासनिक मुद्दा है, तथा इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और पुरानी स्वायत्तता जैसे जटिल विषयों के साथ गड्ड-मड्ड नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा ने विशेष रूप से वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के उल्लेख पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा का इस संबंध में कहना है कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के मुद्दे पर खुली चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, परंतु वे मौजूदा प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता जैसे पुराने मुद्दों को जबरन शामिल किए जाने का कड़ा विरोध करते हैं। भाजपा का रुख यह है कि राज्य के दर्जे की मांग को किसी भी अन्य पुराने और विवादास्पद राजनीतिक प्रस्तावों के संदर्भों से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए।
पुराने प्रस्तावों के जिक्र पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सफाई
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि प्रस्ताव में पुराने विधानसभा प्रस्तावों का उल्लेख केवल ऐतिहासिक संदर्भ के लिए है, न कि उन्हें दोबारा लागू करने या उनकी पुरानी राजनीतिक मांगों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से। उनके अनुसार, वर्तमान प्रस्ताव का मुख्य केंद्र बिंदु केवल और केवल जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा वापस पाना है।
उमर अब्दुल्ला ने राज्य के दर्जे की बहाली को प्रदेश की जनता से किए गए एक बड़े वादे से जोड़ते हुए कहा कि परिसीमन और विधानसभा चुनाव की संवैधानिक प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, इसलिए अब बिना किसी देरी के राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए।
राजनीतिक संदर्भों ने बढ़ाया विधानसभा का टकराव
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में असली विवाद मांग की वैधता से अधिक प्रस्ताव की भाषा और उसके अंतर्निहित राजनीतिक संदर्भों को लेकर दिखाई दे रहा है। जहां एक ओर सरकार पुराने विधानसभा प्रस्तावों का हवाला देकर अपनी मांग को एक व्यापक राजनीतिक पृष्ठभूमि में रख रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इस प्रश्न को अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता के विवादों से पूरी तरह पृथक् रखने पर अड़ी हुई है।
केंद्रीय गृह मंत्री के साथ नेता प्रतिपक्ष की इस मुलाकात ने इस संवेदनशील दौर में विधानसभा की राजनीतिक हलचल को और अधिक तीव्र कर दिया है। हालांकि, इस बैठक में विधानसभा के प्रस्ताव के किसी विशिष्ट प्रावधान पर क्या चर्चा हुई, इसका कोई आधिकारिक विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे टकराव के पूरे आसार बने हुए हैं।

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