नई दिल्ली: लोकसभा में परिसीमन बिल पेश होते ही देश की राजनीति में बड़ा उबाल आ गया है। गुरुवार को लोकसभा में जैसे ही बिल पेश किया गया, सदन से लेकर सडक़ तक विरोध की आग फैल गई। जहां दक्षिण भारत के राज्यों ने इसे अपनी राजनीतिक शक्ति कम करने की साजिश बताया, वहीं विपक्षी दलों ने इसे सरकार का गुप्त एजेंडा करार दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन बिल के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान स्टालिन ने सार्वजनिक रूप से विधेयक की प्रति जलाई और काला झंडा लहराकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने इस कदम को फासीवादी बताते हुए चेतावनी दी कि तमिलनाडु इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगा। स्टालिन ने भावुक अपील करते हुए कहा कि मैं इस बिल की प्रति जलाकर वह आग लगा रहा हूं जो उन लोगों को जवाब देगी जो तमिलों को अपने ही देश में शरणार्थी बनाना चाहते हैं।
डीएमके ने इसे दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लोकसभा में बिल पेश होने के दौरान सरकार को घेरते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूछा कि सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों है? आखिर वह क्या छिपाना चाहती है? अखिलेश ने इसे ‘खुफिया लोगों की गुप्त योजना’ बताते हुए कहा कि सरकार महिला आरक्षण का नाम लेकर असल में परिसीमन के जरिए सत्ता पर कब्जा करना चाहती है। दिलचस्प बात यह है कि जहां अन्य विपक्षी दल विरोध में हैं, वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने महिला आरक्षण का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। हालांकि, उन्होंने भी एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटा देने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया है।
रिजिजू बोले, दक्षिण के राज्यों को बरगला रहा विपक्ष
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सफाई देते हुए कहा कि विपक्ष परिसीमन के गलत आंकड़े पेश कर दक्षिण के राज्यों को बरगला रहा है। उन्होंने कहा कि जब सीटें 850 होंगी, तो आनुपातिक रूप से दक्षिण को भी फायदा होगा।

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