सूरत: अपने गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सूरत में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान वे काफी भावुक नजर आए और राजनीति के अपने शुरुआती दौर को याद किया। पीएम मोदी ने सूरत की जनता की जमकर सराहना करते हुए कहा कि वे इस बात को लेकर बेहद उत्साहित और खुश हैं कि यहां के लोगों ने चुनावी सफलता के मामले में उनके खुद के पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि सूरत से साल 1987 में शुरू हुआ उनका यह राजनीतिक सफर आज भी बिना रुके लगातार जारी है।
'मैं आज बेहद खुश हूं, क्योंकि आपने मेरे रिकॉर्ड भी तोड़ दिए'
हाल ही में गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिली प्रचंड और ऐतिहासिक जीत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा गुजरात की जनता ने भाजपा पर इस कदर अपना भरोसा और प्यार बरसाया है कि इतिहास के सारे पुराने रिकॉर्ड पीछे छूट गए हैं। मैं आज व्यक्तिगत रूप से इसलिए भी ज्यादा खुश हूं क्योंकि सूरत और गुजरात के लोगों ने मेरे बनाए रिकॉर्ड भी तोड़ डाले हैं। मैं राजनीति की मुख्यधारा में काफी देर से आया था, शायद साल 1987 के आसपास। उसके बाद सूरत और अहमदाबाद के निकाय चुनाव मेरी देखरेख में मेरा पहला चुनावी अनुभव था। उस पहले ही चुनाव में हमें भारी विजय मिली थी और तब से लेकर आज तक हमारी यह विजय यात्रा निरंतर चल रही है।"
लगातार समर्थन मिलना दुनिया के लोकतंत्र में दुर्लभ
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के विश्वास को सबसे ऊपर बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक समाज में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है, जहां किसी एक राजनीतिक दल को जनता जनार्दन का इतने लंबे समय तक अटूट आशीर्वाद मिलता रहे। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सूरत और नवसारी के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि जनता ने यह प्रचंड बहुमत हमारे 'सेवाभाव' को देखकर दिया है। यह जीत अहंकार के लिए नहीं, बल्कि सेवा के मिशन को और आगे बढ़ाने के लिए है। हमारा एकमात्र संकल्प 'विकसित गुजरात से विकसित भारत' का निर्माण करना है।
सूरत की स्वच्छता और इसके जज्बे को सलाम
सूरत की अद्भुत कार्यशैली और वहां के नागरिकों की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब वे सूरत को सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि एक 'स्पिरिट' (जज्बा) कहते हैं, तो इसके पीछे उनका एक दृढ़ विश्वास है।
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अटूट प्राथमिकता: जो शहर देश में लगातार स्वच्छता के शीर्ष पुरस्कार हासिल कर रहा हो, वहां के लोगों के मन में यह आ सकता था कि अब बहुत अवॉर्ड जीत लिए, अब आराम किया जाए। लेकिन सूरत की जनता और प्रशासन आज भी सफाई अभियान को अपनी पहली प्राथमिकता मानते हैं।
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महामारी से स्वच्छता का सफर: प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि एक दौर था जब यह शहर प्लेग जैसी भयानक महामारी से जूझ रहा था, लेकिन आज यह अपनी बेमिसाल साफ-सफाई के लिए पूरी दुनिया में मिसाल बन चुका है।
ढाई दशक की मेहनत का नतीजा
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि सूरत का यह आधुनिक और स्वच्छ स्वरूप रातों-रात तैयार नहीं हुआ है, बल्कि इसके लिए बीते ढाई दशकों (25 सालों) में निरंतर और कड़े प्रयास किए गए हैं। सूरत के इस कायाकल्प और विकास का पूरा श्रेय उन्होंने वहां की जागरूक जनता, कर्मठ अधिकारियों, सफाई कर्मचारियों और समर्पित जनप्रतिनिधियों को दिया, जिन्होंने मिलकर इस शहर की तकदीर और तस्वीर बदल दी।

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