August 10, 2026

PFC के शेयर में 6% की गिरावट, CLSA ने कम किया टारगेट प्राइस; अब क्या करें निवेशक?

नई दिल्ली:सरकारी क्षेत्र की प्रमुख महारत्न कंपनी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (PFC) के शेयरों में सोमवार, 10 अगस्त को बाजार के दौरान भारी बिकवाली और गिरावट देखने को मिली। कंपनी के शेयरों में यह कमजोरी मुख्य रूप से उनके हालिया वित्तीय परिणामों के ऐलान के बाद आई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का कर्ज वितरण (डिस्बर्समेंट) धीमा रहने, लोन ग्रोथ में सुस्ती और शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) पर लगातार बने दबाव के चलते कमजोर नतीजे सामने आए। हालांकि, इसके बावजूद कंपनी की एसेट क्वालिटी बेहद मजबूत बनी रही और विदेशी मुद्रा विनिमय तथा प्रावधानों से मिले लाभ ने कर पश्चात मुनाफे (PAT) को सुरक्षित रखने में काफी मदद की।

तिमाही नतीजों में शुद्ध ब्याज आय और ऑपरेटिंग प्रॉफिट का हाल

वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, समीक्षाधीन तिमाही में पीएफसी की शुद्ध ब्याज आय (NII) पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 4.3 प्रतिशत और पिछली तिमाही के मुकाबले 5.2 प्रतिशत घटकर 5,233.5 करोड़ रुपये दर्ज की गई। हालांकि, सरकारी पावर फाइनेंसर का ऑपरेटिंग प्रॉफिट पिछले साल के 4,831.3 करोड़ रुपये से 10.9 प्रतिशत बढ़कर 5,557.1 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, लेकिन मार्च तिमाही के 6,382.4 करोड़ रुपये के आंकड़े के मुकाबले इसमें 16.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस तिमाही के दौरान कंपनी के प्रावधान (प्रोविज़न) सालाना आधार पर 18.5 प्रतिशत कम रहे, जिससे कुल PAT 4,745.4 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो कि पिछले साल से 5.4 प्रतिशत अधिक है।

लोन बुक, मार्जिन का दबाव और डिस्बर्समेंट में आई कमी

कंपनी के लोन पर यील्ड पिछले साल और पिछली तिमाही दोनों के मुकाबले नीचे आई है, जिसके चलते इसका नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3.55 प्रतिशत पर सिमट गया और इस पर दबाव साफ तौर पर देखा गया। जून तिमाही के अंत तक पीएफसी की कुल लोन बुक या एयूएम (AUM) 5.7 लाख करोड़ रुपये रही, जो सालाना आधार पर तो 4 प्रतिशत अधिक है लेकिन मार्च तिमाही की तुलना में 1.7 प्रतिशत कम है। इसके अलावा, इस तिमाही में कंपनी का कुल डिस्बर्समेंट पिछले साल के मुकाबले 44 प्रतिशत और पिछली तिमाही से 50 प्रतिशत गिरकर 20,200 करोड़ रुपये पर आ गया, जिसका मुख्य कारण अधिक प्री-पेमेंट और पहली तिमाही में सीजनल सुस्ती रही।

सीएलएसए ब्रोकरेज फर्म ने घटایا टारगेट प्राइस और दी सलाह

प्रसिद्ध ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए (CLSA) ने पीएफसी के शेयरों पर अपनी 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग को बरकरार रखते हुए इसका टार्गेट प्राइस 550 रुपये से घटाकर 500 रुपये प्रति शेयर कर दिया है, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस से लगभग 19 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। ब्रोकरेज ने यह भी उल्लेख किया कि कंपनी ने पहले REC के साथ विलय को अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है और इसके चलते वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित मुनाफे में मामूली कटौती की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि लोन ग्रोथ में सुस्ती आरबीपीएफ (RBPF) बुक के कम होने के कारण आई है, हालांकि कंपनी की एसेट क्वालिटी अब भी पूरी तरह से नियंत्रण और सुरक्षित दायरे में है।

स्टॉक मार्केट पर असर और शेयरों का मौजूदा कारोबारी रुझान

कंपनी के शेयरों में आई इस गिरावट के बावजूद पीएफसी को कवर करने वाले सभी पंद्रह प्रमुख बाजार विश्लेषकों ने इस शेयर पर खरीदारी (Buy) की मजबूत सलाह दी है। सोमवार के शुरुआती कारोबार के दौरान पीएफसी के शेयर 6.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 392.55 रुपये प्रति शेयर के आसपास ट्रेड करते हुए नजर आए। इस साल अब तक इस स्टॉक में कुल मिलाकर 10.50 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की जा चुकी है, जबकि आज के सत्र के दौरान इसका ऊपरी स्तर (डे हाई) 414.65 रुपये और निचला स्तर (डे लो) 389.60 रुपये के बीच दर्ज किया गया है।