बिश्केक। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच किर्गिस्तान की राजधानी में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा अपने वादों से पीछे हटने के बावजूद उनका देश अंतिम समझौते और आपसी सहमति तक पहुंचने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि युद्ध को लंबा खींचने से किसी भी पक्ष, क्षेत्र या मानवता का भला नहीं होने वाला है, हालांकि अमेरिका में कुछ ऐसे तत्व हैं जो इस संघर्ष को जारी रखना चाहते हैं। पेजेशकियान ने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने में भारत एक बेहद प्रभावशाली और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
चाबहार पोर्ट और होर्मुज की सुरक्षा पर चर्चा
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह के विकास और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर गहन विचार-विमर्श किया। दक्षिण-पूर्वी ईरान में स्थित चाबहार पोर्ट के एक प्रमुख टर्मिनल के निर्माण के लिए भारत ने 12 करोड़ डॉलर (120 मिलियन डॉलर) का निवेश किया है। यह चर्चा इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इस परियोजना पर अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली छूट हाल ही में समाप्त हुई है। दोनों देशों ने रणनीतिक कनेक्टिविटी को बनाए रखने और समुद्री सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
पश्चिम एशिया संकट के बीच गहराता कूटनीतिक संवाद
पश्चिम एशिया में जारी गंभीर संकट और तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच निरंतर संवाद बना हुआ है। इससे पहले जून में भी पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियान के बीच टेलीफोन पर विस्तृत वार्ता हुई थी, जिसमें क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की गई थी। इस ताज़ा बैठक में दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों की समग्र समीक्षा की और व्यापार, ऊर्जा तथा क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत-ईरान सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया।

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