मशहूर अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय द्वारा तमिलनाडु की सत्ता संभालने और मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद से ही मनोरंजन और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। तमाम जानी-मानी हस्तियां विजय की इस अभूतपूर्व सफलता पर अपनी राय रख रही हैं। इसी कड़ी में, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और दिग्गज अभिनेता पवन कल्याण ने विजय को लेकर एक बेहद दिलचस्प टिप्पणी की है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि थलापति विजय की इतनी त्वरित राजनीतिक सफलता को देखकर उन्हें थोड़ी जलन महसूस होती है।
चुनावी नतीजों के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी तुलना
पवन कल्याण का यह बयान ऐसे समय में आया है जब थलापति विजय की नवनिर्मित पार्टी 'तमिलगा वेत्र कझगम' (TVK) ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए प्रचंड बहुमत हासिल किया है। विजय के मुख्यमंत्री बनते ही इंटरनेट पर पवन कल्याण और थलापति विजय के राजनीतिक सफर की तुलना की जाने लगी है। इस पर बात करते हुए पवन कल्याण ने अपने कड़े और लंबे सियासी सफर को याद किया और बताया कि एक राजनीतिक दल को जमीन पर खड़ा करने के लिए जनता की उम्मीदों को बारीकी से समझना होता है।
'मैं 15 साल तक सड़कों पर संघर्ष करता रहा' — पवन कल्याण
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "आजकल जब मैं तमिलनाडु के सियासी घटनाक्रम को देखता हूं, तो सोचता हूं कि विजय ने कितनी सहजता और सरलता से यह सब हासिल कर लिया। मुझे सचमुच ईर्ष्या हुई। उन्होंने केवल पोस्टर्स, कटआउट्स और होलोग्राम के जरिए बड़ी ही खुशी-खुशी चुनावी जंग जीत ली। वहीं दूसरी तरफ, मैं पिछले 15 वर्षों से लगातार सड़कों पर धूप और धूल में संघर्ष कर रहा था। खैर, मैं सिर्फ मजाक कर रहा हूं।"
उन्होंने आगे गंभीर रुख अपनाते हुए कहा, "हमें राजनीति को मानवीय नजरिए से देखने की आवश्यकता है। समाज के लिए कुछ भी बोलने या करने से पहले आपके पास गहरा अनुभव होना चाहिए। मैंने डेढ़ दशक तक इतनी कड़ी मेहनत इसलिए की, क्योंकि एक मजबूत संगठन चलाने के लिए आपको लाखों आम लोगों की आकांक्षाओं और दुखों को आत्मसात करना पड़ता है।"
शुरुआती उतार-चढ़ाव से उपमुख्यमंत्री के पद तक का सफर
पवन कल्याण ने साल 2014 में आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक नई वैकल्पिक व्यवस्था देने के संकल्प के साथ 'जन सेना पार्टी' (JSP) की नींव रखी थी। हालांकि, शुरुआती सालों में उनकी पार्टी को चुनावी मोर्चे पर कई बड़े झटके लगे। साल 2019 के विधानसभा चुनावों में पवन कल्याण स्वयं उन दोनों सीटों से चुनाव हार गए थे, जहां से उन्होंने पर्चा भरा था, और उनकी पूरी पार्टी महज एक सीट पर सिमट कर रह गई थी।
लगातार संघर्ष के बाद, साल 2024 के चुनावों में 'तेलुगु देशम पार्टी' (TDP) के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने के बाद पवन कल्याण की किस्मत ने करवट बदली। इस मजबूत मोर्चे ने आंध्र प्रदेश के चुनावों में एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की, जिसके बाद पवन कल्याण को सूबे का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। दूसरी ओर, थलापति विजय ने अपनी पहली ही कोशिश में सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है, जो समूचे दक्षिण भारत की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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