भोपाल। देश के 50 प्रमुख शहरों में साफ-सफाई और सैनिटेशन व्यवस्था को एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में स्थापित करने के विशेष लक्ष्य के तहत केंद्र सरकार द्वारा 'प्रगति-50' (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) नामक एक महत्वपूर्ण पहल का शुभारंभ किया जा रहा है। मध्य प्रदेश राज्य से इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत इंदौर, भोपाल और उज्जैन जैसे महत्वपूर्ण शहरों को शामिल किया गया है। 'स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0' के अंतर्गत आने वाले इन चयनित शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन, अपशिष्ट जल (गंदे पानी) के उपचार, सार्वजनिक स्वच्छता के बुनियादी ढांचे और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से जुड़ी व्यवस्थाओं को और अधिक उन्नत व मजबूत बनाया जाएगा।
चयन के लिए निर्धारित किए गए मुख्य आधार
इस राष्ट्रव्यापी पहल का विधिवत शुभारंभ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री करेंगे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चयनित शहरों में स्वच्छता से जुड़ी कमियों और सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की निरंतर निगरानी करना तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी विकास कार्यों को पूर्ण करना है।
मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार, इन शहरों का चयन केवल 'स्वच्छ सर्वेक्षण' की रैंकिंग के आधार पर ही नहीं किया गया है। इसके चयन में गार्बेज फ्री सिटी (GFC) स्टार रेटिंग, कचरा प्रबंधन की क्षमता, शहर की कुल आबादी, भौगोलिक स्थिति और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों को आधार बनाया गया है।
मध्य प्रदेश के तीनों चयनित शहरों में विशेष कार्ययोजना
इस योजना के तहत प्रदेश के तीनों प्रमुख शहरों में उनकी आवश्यकताओं के अनुसार विशेष विकास कार्य किए जाएंगे:
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इंदौर: शहर की मौजूदा कचरा संग्रहण, छंटाई और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) व्यवस्था को इस पहल के तहत और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। घरों से कचरे का पृथक्करण, उसका परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम वैज्ञानिक निपटान की पूरी श्रृंखला की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। इसके साथ ही, खाद निर्माण (कम्पोस्टिंग), उपयोगी सामग्रियों की छंटाई, बायोगैस उत्पादन तथा प्रयुक्त जल (Used Water) के उपचार एवं उसके पुनर्चक्रण (Recycling) की निगरानी भी की जाएगी।
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उज्जैन: वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले आगामी 'सिंहस्थ' महाकुंभ को दृष्टिगत रखते हुए पावन क्षिप्रा नदी के घाटों, सार्वजनिक शौचालयों तथा ठोस व तरल कचरा प्रबंधन प्रणालियों को अत्यंत मजबूत बनाया जाएगा। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के विशाल जनसमूह को ध्यान में रखते हुए साफ-सफाई, जल शुद्धता और 'जीरो वेस्ट' मॉडल के तहत कचरा न्यूनीकरण पर मुख्य रूप से काम किया जाएगा।
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भोपाल: वर्ष 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को ध्यान में रखते हुए शहर में उन्नत कचरा प्रबंधन, इस्तेमाल किए गए पानी के पुनः उपयोग (Reuse), प्रमुख सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट पर फोकस किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, स्वच्छता के कार्यों में निजी क्षेत्र की भागीदारी (Public-Private Partnership) को भी प्रोत्साहित करने की योजना है।

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