मुंबई। गोल्डमैन सैक्स की हालिया शोध रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही फिर से सुरक्षित रूप से शुरू हो जाती है, तो खाड़ी देशों के कच्चे तेल उत्पादन में अगले कुछ महीनों के भीतर बड़ी रिकवरी देखी जा सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार रहता है, तो उत्पादन को युद्ध से पहले वाली स्थिति में लौटने में लंबा समय लग सकता है।
इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
उत्पादन में भारी गिरावट और बहाली की संभावना
-
मौजूदा स्थिति: संघर्ष के चलते खाड़ी देशों का तेल उत्पादन लगभग 57 प्रतिशत (14.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन) तक गिर गया है।
-
बहाली की शर्त: यदि तेल के बुनियादी ढांचे पर नए हमले रुक जाते हैं और जलमार्ग खुल जाता है, तो उत्पादन तेजी से पटरी पर लौट सकता है।
-
चुनौतियां: बहाली की गति पूरी तरह से पाइपलाइन की क्षमता, खाली टैंकरों की उपलब्धता और तेल क्षेत्रों में होने वाले मरम्मत कार्यों पर निर्भर करेगी।
टैंकरों की कमी और अतिरिक्त क्षमता
रिपोर्ट के अनुसार, तनाव शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में खाली टैंकरों की क्षमता 50 प्रतिशत घटकर महज 130 मिलियन बैरल रह गई है।
-
सऊदी और यूएई की भूमिका: सऊदी अरामको और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास वर्तमान में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद है। बाजार में स्थिरता लाने के लिए इस अतिरिक्त क्षमता का उपयोग किया जा सकता है।
-
रिकवरी का अनुमान: बाहरी विशेषज्ञों का मानना है कि जलमार्ग दोबारा खुलने के:
-
3 महीने बाद: लगभग 70 प्रतिशत उत्पादन बहाल हो सकता है।
-
6 महीने बाद: करीब 88 प्रतिशत तक उत्पादन सामान्य हो सकता है।
-
लंबी अवधि का जोखिम
गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यदि मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो पूर्ण बहाली की प्रक्रिया कई तिमाहियों तक खिंच सकती है। बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और रसद (Logistics) की कमी इस पूरी प्रक्रिया को जटिल बना सकती है।

More Stories
Paytm पर भारतीय रिजर्व बैंक की कार्रवाई, कंपनी बोली—सेवाएं जारी रहेंगी
भारत-न्यूजीलैंड FTA पर 27 को हस्ताक्षर, आर्थिक रिश्तों को मिलेगा नया आयाम
AI खतरों पर सख्ती: बैंकों के साथ मिलकर रणनीति बनाएगा SBI, सीतारमण का ऐलान