October 19, 2026

NHAI की कार्रवाई से मचा हड़कंप, एक कंपनी बैन और छह अन्य जांच के दायरे में

नई दिल्ली। देशभर में घटिया गुणवत्ता वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली एजेंसियों के खिलाफ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मंत्रालय की इस सख्त कार्रवाई के तहत देश की सात प्रमुख निर्माण कंपनियां सीधे तौर पर रडार पर आ गई हैं, जिनके द्वारा कराए गए निर्माण कार्यों की विस्तृत और गहन जांच आरंभ कर दी गई है। केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट और कड़ा संदेश जारी किया है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही या निम्नस्तरीय सामग्री का उपयोग कतई सहन नहीं किया जाएगा।

पुंडियानकुप्पम–सत्तनाथपुरम प्रोजेक्ट पर दो साल का बैन

मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु राज्य में स्थित एनएच-45ए (नया एनएच-32) के पुंडियानकुप्पम से सत्तनाथपुरम खंड पर हाल ही में निर्मित सड़क का एक विशाल हिस्सा अचानक धंस गया था, जिसके साथ ही सड़क को सहारा देने वाली सुरक्षा रिटेनिंग वॉल भी धराशायी हो गई थी। इस दुर्घटना की उच्च स्तरीय जांच पूरी होने के बाद मंत्रालय ने 12 अक्तूबर को इसे एक अत्यंत विनाशकारी और अक्षम्य घटना माना। इस गंभीर लापरवाही को ध्यान में रखते हुए संबंधित निर्माण एजेंसी को सड़क परिवहन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सभी भावी परियोजनाओं में हिस्सा लेने से दो वर्ष की अवधि के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है, हालांकि संबंधित फर्म के पास इस फैसले के विरुद्ध न्यायिक शरण में जाने का विकल्प मौजूद है। उल्लेखनीय है कि चार लेन वाला यह पूरा प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत 2,120.40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित किया गया था।

देहरादून और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गहन जांच

इसके अलावा, हाल के दिनों में महत्वाकांक्षी देहरादून एक्सप्रेसवे तथा उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह गड्ढे उभरने और संरचनात्मक खामियां उजागर होने की शिकायतें दर्ज की गई थीं। प्राथमिक पड़ताल में इन दोनों प्रमुख ढांचागत परियोजनाओं में शुरुआती डिजाइनिंग स्तर की बड़ी खामियाँ होने का अंदेशा जताया गया है। इन खुलासों के बाद सड़क मंत्रालय ने दोनों एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की उच्चस्तरीय और तकनीकी जांच कराने के आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं।

जांच के घेरे में देश की 6 से 7 बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियां

सड़क मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में पाई गई गड़बड़ियों और हादसों से जुड़ी अनेक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन सभी शिकायतों की विस्तृत स्तर पर समीक्षा की जा रही है और फिलहाल देश की 6 से 7 नामी कंस्ट्रक्शन कंपनियां इस जांच के घेरे में शामिल हैं। जांच प्रक्रिया और अंतिम तकनीकी रिपोर्ट पूरी होते ही दोषी पाई जाने वाली अन्य कंपनियों पर भी भारी आर्थिक जुर्माने और भविष्य की बोलियों से बाहर करने जैसी सख्त प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां अमल में लाई जाएंगी।