त्विषा केस में नया मोड़! AIIMS दिल्ली करेगी री-पोस्टमार्टम, समर्थ ने वापस ली अग्रिम जमानत अर्जी

जबलपुर। भोपाल के हाई-प्रोफाइल त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान कई बड़े और अहम घटनाक्रम सामने आए हैं। न्यायमूर्ति अवनींद्र सिंह की एकलपीठ के समक्ष हुई इस सुनवाई ने मामले की दिशा बदल दी है। एक तरफ जहां मुख्य आरोपी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं, वहीं दूसरी तरफ निष्पक्ष जांच के लिए अदालत ने बेहद कड़े और अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। अब इस पूरे मामले की जांच और आने वाले फैसलों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

इस महत्वपूर्ण अदालती सुनवाई के मुख्य बिंदुओं और आदेशों को हम कुछ प्रमुख भागों में समझ सकते हैं:

मुख्य आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त, सरेंडर की संभावना

मामले के मुख्य आरोपी और मृतका के पति समर्थ सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान समर्थ सिंह के अधिवक्ता ने अपनी ओर से लगाई गई अग्रिम जमानत याचिका को वापस लेने का निवेदन किया। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए जमानत याचिका को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। कानूनी गलियारों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद अब मुख्य आरोपी समर्थ सिंह जल्द ही भोपाल की निचली अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर सकता है।

दिल्ली एम्स की टीम करेगी दोबारा पोस्टमार्टम, रिपोर्ट रहेगी सीलबंद

सुनवाई के दौरान त्विषा के मायके पक्ष की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में अपना मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की, जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी। चूंकि मृतका का शव काफी समय से सुरक्षित रखा गया है, इसलिए कोर्ट ने दिल्ली एम्स (AIIMS) के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम को तुरंत भोपाल पहुंचकर नए सिरे से पोस्टमार्टम करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी साफ किया है कि यह रिपोर्ट पूरी तरह गोपनीय रहेगी और सीलबंद लिफाफे में सीधे कोर्ट के सामने पेश की जाएगी। इसके साथ ही, कोर्ट ने ससुराल पक्ष की उस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने शव को उन्हें सौंपने का आग्रह किया था।

पूर्व जज सास की जमानत पर सवाल और कोर्ट का नोटिस

इस मामले की दूसरी सह-आरोपी, मृतका की सास और सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत पर भी कोर्ट में तीखी बहस हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने तर्क दिया कि आरोपी पक्ष अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके साक्ष्यों (सबूतों) को प्रभावित या नष्ट कर सकता है, इसलिए इस जमानत का दुरुपयोग होने की पूरी आशंका है। हाई कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिए हैं। पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने वाली इस याचिका पर अब अगली सुनवाई सोमवार को की जाएगी।