August 31, 2026

कावेरी विवाद में नया मोड़, कर्नाटक बोला- तय मात्रा से अधिक पानी छोड़ा; तमिलनाडु की अलग मांग

नई दिल्ली | कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर सोमवार को उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार ने अदालत को आधिकारिक रूप से अवगत कराया कि उसने 31 अगस्त तक तमिलनाडु के लिए निर्धारित मात्रा से भी अधिक पानी छोड़ा है। राज्य की ओर से स्पष्ट किया गया कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के उस निर्देश का पूरी तरह से पालन कर रहा है, जिसमें अगले 15 दिनों तक रोजाना 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया गया था।

कर्नाटक का पक्ष और छोड़े गए पानी के आंकड़े

कर्नाटक की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि 25 अगस्त के निर्देश के मुताबिक प्रतिदिन 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना तय हुआ था। इसके अनुपालन में कर्नाटक ने तय मानकों से अधिक पानी प्रवाहित किया है:

  • पहले दिन कर्नाटक की तरफ से 10,727 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।

  • इसके बाद 30 अगस्त को 9,888 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।

  • वहीं, 31 अगस्त को सुबह आठ बजे तक 11,547 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका था।

कर्नाटक सरकार का कहना है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद वह पड़ोसी राज्य के हितों का ध्यान रखते हुए निर्धारित कोटे से ज्यादा पानी छोड़ रहा है।

तमिलनाडु की क्या है मुख्य शिकायत?

दूसरी ओर, तमिलनाडु सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि राज्य ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के समक्ष पानी के पुराने बकाये का गंभीर मुद्दा उठाया था, लेकिन उस पर उचित दिशा-निर्देश नहीं दिए गए। उन्होंने बताया कि इससे पहले कर्नाटक को 12 अगस्त से शुरू होकर 15 दिनों तक रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था, जिसे बाद में घटाकर 9,000 क्यूसेक कर दिया गया। तमिलनाडु का यह भी कहना है कि कम बारिश वाले इस वर्ष में उसे उसके हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनते हुए कहा कि यदि तमिलनाडु को पानी की आवश्यकता है, तो वर्तमान में कर्नाटक की ओर से पानी छोड़ा जा रहा है। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के फैसलों को उचित कानूनी मंच पर चुनौती दी जानी चाहिए।

सुनवाई में अदालत को यह जानकारी दी गई कि 'कावेरी जल विनियमन समिति' (CWRC) प्रत्येक 15 दिन पर मैदानी हालात की निरंतर समीक्षा कर रही है और सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद ही आवश्यक आदेश जारी कर रही है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ही राज्यों को जल उपलब्धता से जुड़े ताजा आंकड़े आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

सूखे की स्थिति और मामले की पृष्ठभूमि

कर्नाटक ने अदालत में राज्य के भीतर गंभीर सूखे का हवाला देते हुए बताया कि उसके कई जिलों में, विशेषकर कावेरी नदी बेसिन के अंतर्गत आने वाले इलाकों में सूखा घोषित किया गया है। इसके विपरीत, तमिलनाडु ने अपने पुराने बकाये के पानी को तुरंत पूरा करने की मांग पर जोर दिया है, जिससे यह कानूनी विवाद केवल वर्तमान जलापूर्ति तक सीमित न रहकर पुराने बकाये और दोनों राज्यों की भू-जल स्थिति तक फैल गया है।

ज्ञात हो कि तमिलनाडु सरकार ने इस वर्ष 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसे विनियमन समिति द्वारा तय और कर्नाटक द्वारा छोड़े जा रहा—दोनों ही रूपों में कम पानी मिल रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को तय की गई है, जहाँ दोनों राज्यों के नए आंकड़े और बकाये पानी का मुद्दा केंद्रीय भूमिका निभाएगा।