October 31, 2026

बनारस रोपवे के यात्रियों के लिए नया नियम, गंडोला में पीक थूकने पर भरना होगा जुर्माना

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी (वाराणसी) में बहुप्रतीक्षित रोपवे (गंडोला) सेवा का संचालन इसी वर्ष दिसंबर माह से आम जनता के लिए शुरू होने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग छियानवे प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है और इन दिनों इसका नियमित ट्रायल चल रहा है। इस आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के उपयोग को लेकर प्रशासन ने बेहद सख्त और अनूठी पाबंदियां तय की हैं। इसके तहत यदि कोई यात्री पान या गुटखा खाकर रोपवे स्टेशन के भीतर प्रवेश करने का प्रयास करेगा, तो उसे एंट्री नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं, यदि सफर के दौरान गंडोला के भीतर किसी ने भी पीक थूकी या गंदगी फैलाने की कोशिश की, तो उस पर भारी-भरकम जुर्माना वसूला जाएगा। यात्रियों को अपने साथ पान-गुटखा ले जाने की भी अनुमति नहीं होगी, और नियमों के पालन हेतु स्टेशनों के बाहर विशेष पीकदान भी स्थापित किए जाएंगे।

कैंट से गोदौलिया का सफर, किराया और सामान ले जाने के नियम

इस अत्याधुनिक रोपवे सेवा के शुरू होने से कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक की दूरी महज पंद्रह से सोलह मिनट में तय की जा सकेगी। इस यात्रा के लिए न्यूनतम किराया दस रुपये होगा, जबकि कैंट से गोदौलिया तक का पूरा किराया पचास रुपये तय किया गया है। यदि यात्रियों के पास नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) उपलब्ध है, तो उन्हें किराए में बीस प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान की जाएगी। सुरक्षा और सुगमता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक यात्री को अपने साथ अधिकतम सात किलोग्राम वजन का सामान ले जाने की अनुमति होगी। यदि किसी यात्री के पास इससे अधिक सामान हुआ, तो उसे अतिरिक्त टिकट लेना होगा, जबकि यात्रियों की सुविधा के लिए कैंट रोपवे स्टेशन परिसर में ही आधुनिक लॉकर्स की व्यवस्था भी की गई है।

आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी विशेषताएं और गति सीमा

यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इसमें यूरोपीय मानकों के अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनका संस्थापन स्विट्जरलैंड के विशेषज्ञ इंजीनियरों की देखरेख में किया गया है। रोपवे परियोजना निदेशक पूजा मिश्रा ने बताया कि यह प्रणाली प्रतिदिन सोलह घंटे संचालित होगी। यदि सफर के दौरान कभी बिजली आपूर्ति बाधित होती है या कोई तकनीकी बाधा आती है, तो जनरेटर बैकअप के जरिए गंडोला को स्वतः सबसे नजदीकी स्टेशन तक पहुंचा दिया जाएगा, जहां से यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा। इसके अलावा तेज हवाओं से निपटने के लिए साठ किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा निर्धारित की गई है, इससे अधिक हवा चलने पर गंडोला स्वतः रुककर निकटतम स्टेशन पहुंच जाएगा। इस गंडोला की अधिकतम गति छह मीटर प्रति सेकंड यानी लगभग इक्कीस दशमलव छह किलोमीटर प्रति घंटा है।

यात्रियों के लिए टिकटिंग, बुजुर्गों की सुविधा और रूट का नज़ारा

आम नागरिक आसानी से सफर कर सकें, इसके लिए स्टेशनों के मुख्य प्रवेश द्वार पर टिकट काउंटर के साथ-साथ स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीनें (ATVM) भी लगाई गई हैं। यात्री अपना टिकट स्वयं भी जेनरेट कर सकेंगे। बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुगमता के लिए प्रत्येक स्टेशन पर लिफ्ट और एस्केलेटर की पूरी व्यवस्था की गई है, और दिव्यांगजन अपनी व्हीलचेयर के साथ सीधे गंडोला के भीतर तक प्रवेश कर सकेंगे। सफर के दौरान सबसे खूबसूरत दृश्य गिरिजाघर के पास से दिखाई देगा, जहां से काशी की ऐतिहासिक संकरी गलियां और प्राचीन मंदिरों के शिखर नजर आएंगे। सुरक्षा के मद्देनजर संपूर्ण कॉरिडोर क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

क्षमता, रेलवे स्टेशन से सीधा संपर्क और दिसंबर से शुरुआत

इस सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में कुल एक सौ अड़तालीस गंडोले संचालित होंगे तथा दो गंडोले आपातकालीन स्थिति के लिए आरक्षित रहेंगे। एक गंडोला में एक साथ दस यात्री सफर कर सकेंगे, जिससे प्रति घंटे लगभग तीन हजार यात्री अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। काशी आने वाले रेल यात्रियों की सुविधा के लिए कैंट रेलवे स्टेशन के वेटिंग हॉल से सीधे रोपवे स्टेशन तक एक पाथवे (ब्रिज) का निर्माण किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को बाहर की भीड़भाड़ से नहीं गुजरना पड़ेगा। दिसंबर माह से इस सेवा के शुरू होने की पूरी संभावना है, और गोदौलिया स्टेशन तक का शेष कार्य भी अगले एक महीने में पूर्ण कर लिया जाएगा।