दिल्ली में जल्द आएगी नई EV पॉलिसी, अंतिम फैसले पर कैबिनेट की मुहर बाकी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार अगले महीने एक नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति को धरातल पर उतार सकती है। इसके लिए आगामी सप्ताह होने वाली कैबिनेट की बैठक में 'दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0' के मसौदे को मंजूरी के लिए पेश करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में लागू पुरानी ईवी नीति की समय-सीमा आगामी 30 जून को समाप्त होने जा रही है, जिसे और आगे विस्तार देने के बजाय सरकार अब सीधे नए और सुधारे हुए नियमों को लागू करने की पक्षधर है।

हाइब्रिड कारों को छूट देने के प्रावधान पर फंसा था पेंच

परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, नई नीति का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया गया है जिसे कैबिनेट की अंतिम मुहर के बाद लागू कर दिया जाएगा। इससे पूर्व अप्रैल महीने में इस ड्राफ्ट को आम जनता के सुझावों और आपत्तियों के लिए सार्वजनिक मंच पर साझा किया गया था। इस नीति को लागू करने में देरी की मुख्य वजह हाइब्रिड (ईंधन और बैटरी दोनों से चलने वाले) वाहनों को रियायतें देने के प्रस्ताव पर विभिन्न विभागों के बीच आम सहमति न बन पाना था। नए मसौदे के तहत 30 लाख रुपये तक की कीमत वाली हाइब्रिड गाड़ियों पर रोड टैक्स में 50 प्रतिशत तक की भारी छूट देने की बात कही गई है, जिसका कुछ विशेषज्ञ यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि सरकारी प्रोत्साहन राशि का लाभ केवल 100 प्रतिशत शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों को ही मिलना चाहिए।

पेट्रोल और सीएनजी के नए पंजीकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी

प्रस्तावित 'ईवी पॉलिसी 2.0' में राजधानी की हवा को साफ करने के लिए कुछ बेहद कड़े और दूरगामी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके अंतर्गत दिल्ली में जनवरी 2027 से नए सीएनजी चालित तिपहिया वाहनों (ऑटो) के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह से रोक लगाने का खाका तैयार किया गया है। इतना ही नहीं, अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए पेट्रोल चालित दोपहिया वाहनों (मोटरसाइकिल और स्कूटर) के पंजीकरण को भी पूरी तरह बंद करने का क्रांतिकारी प्रस्ताव शामिल है। सरकार की मंशा इन दोनों ही लोकप्रिय वाहन श्रेणियों को आने वाले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक सेगमेंट में तब्दील करने की है।

पुराने लक्ष्यों की समीक्षा और नए बदलावों से बड़ी उम्मीदें

गौरतलब है कि दिल्ली की शुरुआती ईवी नीति वैसे तो अगस्त 2023 में ही अपनी अवधि पूरी कर चुकी थी, परंतु नई योजना के अधर में लटके होने के कारण सरकार ने प्रशासनिक आदेशों के जरिए इसे बार-बार विस्तार दिया था। पिछली नीति के तहत प्रशासन ने वर्ष 2025 तक कुल नए पंजीकृत होने वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी को 25 फीसदी तक ले जाने का महत्वाकांक्षी संकल्प लिया था, जिसे अभी तक पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सका है। इसके बावजूद, दिल्ली सरकार को पूरा भरोसा है कि आगामी संशोधनों और हाइब्रिड वाहनों को मिलने वाले नए इंसेंटिव्स के बूते दिल्ली में ई-वाहनों के बाजार और उनके इस्तेमाल को एक अभूतपूर्व रफ्तार मिलेगी।