मंदसौर | मंदसौर जिले में नगर पालिका के कर्मचारी अपनी विभिन्न 15 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले काफी समय से अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। अपनी इन न्यायसंगत मांगों को शासन और प्रशासन तक पहुँचाने के लिए आंदोलित कर्मचारियों ने अब अनोखा तरीका अपनाते हुए रात के समय थाली बजाकर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का यह विरोध-प्रदर्शन रात के सन्नाटे में काफी देर तक निरंतर चलता रहा, जिससे प्रशासन की नींद उड़ गई है।
नपा कर्मचारियों का संयुक्त मोर्चा और लंबे समय से जारी आंदोलन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगरपालिका कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले ये सभी कर्मचारी गत 19 सितंबर से लगातार आंदोलन की राह पर हैं। इस आंदोलन के अगले चरण के तहत 26 सितंबर से 1 अक्टूबर तक विभिन्न विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से लगातार अपनी प्रमुख माँगों को शासन-प्रशासन के समक्ष पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए कई बार उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं, परंतु शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रमुख माँगें: नियमितीकरण और अनुकंपा नियुक्ति
धरने पर बैठे कर्मचारियों की मुख्य माँगों में यह प्रमुख रूप से शामिल है कि जो दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से निरंतर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से स्थायी (नियमित) किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यह भी माँग उठाई गई है कि यदि सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार के किसी एक पात्र सदस्य को नियमों में ढील देते हुए एक महीने के भीतर अनिवार्य रूप से अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए।
ज्ञापन देने पर मिलने वाले नोटिस और अन्य माँगें
कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जब वे अपनी जायज माँगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हैं, तो उन्हें बदले में कार्रवाई का डर दिखाने के लिए नोटिस जारी किए जाते हैं या फिर नौकरी से बर्खास्त करने की धमकियाँ दी जाती हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। इसके अतिरिक्त उन्होंने यह भी माँग रखी है कि शहर में होने वाले किसी भी बड़े सामाजिक कार्यक्रम या राजनीतिक रैली के समापन के बाद सड़क पर फैले कचरे की साफ-सफाई का पूरा खर्च संबंधित आयोजक से वसूला जाना चाहिए। कर्मचारियों की यह भी माँग है कि किसी भी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति से ठीक 6 महीने पूर्व ही उसके सभी प्रकार के वित्तीय बकायों का अंतिम भुगतान कर दिया जाए और उनके परिवार के एक सदस्य को सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्ति दी जाए।
आउटसोर्सिंग प्रथा बंद करने और कार्य अवधि की सीमा का आग्रह
आंदोलनकारी कर्मचारियों की यह भी पुरजोर माँग है कि विभाग में आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए। कर्मचारियों से तय नियमानुसार केवल 8 घंटे ही काम लिया जाए और यदि किसी परिस्थिति में उनसे अतिरिक्त (ओवरटाइम) कार्य करवाया जाता है, तो उसका नियमानुसार उचित भत्ता दिया जाए। इसके अलावा, किसी भी कर्मचारी का पक्ष सुने बिना और बिना उचित जाँच के उसे सेवा से पृथक् न किए जाने, तथा सभी कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका (Service Book) के संधारण और भविष्य निधि (EPF) से जुड़े मामलों का पारदर्शी तरीके से समाधान करने की भी जोरदार आवाज उठाई गई है।

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