September 24, 2026

छत्तीसगढ़ में धान की खेती का बदलेगा आकलन तरीका, डिजिटल क्रॉप सर्वे को मिलेगा आधार

रायपुर। मानसून के सीजन में प्रदेश के किसानों के लिए एक राहत भरी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ में धान की खेती के कुल क्षेत्रफल का सटीक, वैज्ञानिक और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित आकलन करने के लिए साय सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। इस पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीजीसीओएसटी) के मध्य एक द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) निष्पादित हुआ है।

इसके माध्यम से राज्य में सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) जैसी उन्नत तकनीकों का प्रयोग करके धान के रकबे की सटीक मैपिंग और सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य राज्य में धान के वास्तविक कृषि क्षेत्र के आंकड़ों को अधिक प्रामाणिक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। तकनीक-आधारित इस प्रणाली से भू-अभिलेखों, डिजिटल क्रॉप सर्वे और उपग्रह-आधारित फसल सत्यापन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जिससे धान खरीदी से जुड़ी प्रक्रियाओं में डेटा की शुद्धता और पारदर्शिता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

एफआरए एवं डुबान क्षेत्रों का डिजिटल मानचित्रण

इस समझौते के तहत विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) तथा डुबान क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले कृषि भू-भागों के चिह्नांकन और मैपिंग पर प्राथमिकता से कार्य किया जाएगा, जिनका रिकॉर्ड वर्तमान में जियो-रेफरेंस्ड रूप में उपलब्ध नहीं है। ऐसे क्षेत्रों की जीआईएस-आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जिससे उनकी डिजिटल भौगोलिक पहचान स्थापित हो सके। दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में सैटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग के जरिए धान के क्षेत्रफल की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकेगी, जहां पारंपरिक भू-राजस्व अभिलेखों से सत्यापन में व्यावहारिक कठिनाइयां आती थीं।

उपग्रह इमेजरी के माध्यम से भू-खंडों का तकनीकी मिलान

राज्य के अन्य जियो-रेफरेंस्ड कृषि क्षेत्रों के अक्षांश एवं देशांतर का उपग्रह इमेजरी के साथ मिलान किया जाएगा। इस तकनीकी जांच से डिजिटल रिकॉर्ड और खेत की वास्तविक स्थिति के मध्य सीधा समन्वय स्थापित होगा। सैटेलाइट आंकड़ों और जीआईएस मैपिंग के उपयोग से फसल आकलन में इंसानी हस्तक्षेप न्यूनतम हो जाएगा तथा विशाल भौगोलिक क्षेत्र में फसल की स्थिति का व्यवस्थित वैज्ञानिक विश्लेषण संभव हो सकेगा।

डिजिटल फसल सर्वेक्षण हेतु मजबूत भू-स्थानिक ढांचा

खाद्य संचालनालय और सीजीसीओएसटी के इस तकनीकी सहयोग से राज्य में डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए एक सुदृढ़ भू-स्थानिक आधार तैयार होगा। एफआरए तथा डूब प्रभावित कृषि क्षेत्रों की मैपिंग होने से इन भू-भागों के कृषि डेटा को मुख्य डिजिटल सिस्टम से आसानी से जोड़ा जा सकेगा। इसके जरिए भूमि रिकॉर्ड, फसल सर्वेक्षण और उपग्रह सत्यापन एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करेंगे, जिससे भविष्य में कृषि नीति निर्माण एवं डेटा विश्लेषण हेतु ठोस आधार प्राप्त होगा।

डेटा एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशासनिक व्यवस्था

छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन एक वृहद प्रशासनिक प्रक्रिया है। इस व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने में धान के रकबे की सटीक जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से उपग्रह और भू-स्थानिक डेटा का उपयोग बढ़ेगा, जिससे धान खरीदी से जुड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए अत्यधिक प्रामाणिक और त्रुटिहीन डेटा उपलब्ध होगा।

प्रमुख बिंदु एवं संक्षिप्त तथ्य

  • वैज्ञानिक आकलन: छत्तीसगढ़ में धान की खेती का अब सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक से सटीक आकलन होगा।

  • रणनीतिक समझौता: खाद्य संचालनालय और सीजीसीओएसटी के मध्य तकनीकी सहयोग हेतु एमओयू हस्ताक्षरित।

  • विशेष मैपिंग: एफआरए एवं डुबान क्षेत्रों की कृषि भूमि की डिजिटल पहचान और मैपिंग को प्राथमिकता।

  • सत्यापन प्रणाली: जियो-रेफरेंस्ड भू-खंडों के अक्षांश-देशांतर का सैटेलाइट डेटा से मिलान कर फसल की उपस्थिति प्रमाणित की जाएगी।

  • पारदर्शिता में वृद्धि: धान उपार्जन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और डेटा-संचालित बनेगी।