नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में लगातार बिगड़ते पर्यावरण और वायु प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन के तहत लागू ग्रैप-2 (GRAP-2) प्रतिबंधों के नियमों का अनुपालन करते हुए निगम अपने लगभग 400 खुले पार्किंग स्थलों पर वाहनों के पार्किंग शुल्क को दोगुना करने जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में तैयार किए गए प्रस्ताव को सक्षम प्राधिकारी की ओर से शीघ्र ही अंतिम स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य शहर की सड़कों पर निजी वाहनों के उपयोग को नियंत्रित करना और नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करना है।
विधि विभाग में समीक्षा और संशोधित दरों को मंजूरी की प्रक्रिया
निगम सूत्रों के मुताबिक, पार्किंग दरों में बढ़ोतरी से जुड़ा यह प्रस्ताव वर्तमान में नगर निगम के विधि विभाग के पास कानूनी समीक्षा के लिए विचाराधीन है। विधिक जांच पूरी होने के उपरांत आगामी एक से दो दिनों के भीतर सक्षम स्तर से आवश्यक औपचारिक मंजूरी प्राप्त होते ही नई दरों को धरातल पर लागू कर दिया जाएगा। हालांकि, पिछले वर्षों के अनुभवों को देखें तो नगर निगम निजी पार्किंग ठेकेदारों के साथ हुए मौजूदा अनुबंधों की जटिलताओं और जनप्रतिनिधियों के विरोध के कारण इस प्रकार की वृद्धि को सुचारू रूप से लागू करने में चुनौतियों का सामना करता रहा है।
ठेकेदारों से जुड़े अनुबंध और राजस्व का पेच
पार्किंग दरों में बढ़ोतरी के कार्यान्वयन को लेकर निगम के भीतर वित्तीय और संविदात्मक सवाल भी उठ रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा समझौतों के तहत पार्किंग शुल्क दोगुना किए जाने से प्राप्त होने वाला अतिरिक्त राजस्व स्वतः निगम के खाते में जमा नहीं होता, बल्कि उसका बड़ा हिस्सा निजी ठेकेदारों की जेब में जाने का जोखिम बना रहता है। इसके अतिरिक्त, प्रतिबंधित पुराने वाहनों के सड़क पर न उतरने के कारण पार्किंग संचालकों द्वारा होने वाले वित्तीय नुकसान के बदले निगम से मुआवजे की मांग किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
पूर्व के प्रस्तावों और आंकड़ों की कमी से जुड़ी चुनौतियां
नगर निगम को दिल्ली-एनसीआर से आने-जाने वाले वाहनों के एकीकृत डेटाबेस और सटीक पंजीकरण आंकड़ों की कमी का भी सामना करना पड़ता है, क्योंकि यह रिकॉर्ड मुख्य रूप से परिवहन विभाग के अधीन होता है। पूर्व में भी एमसीडी द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर पार्किंग दरों को चार गुना तक बढ़ाने के कई प्रयास और प्रस्ताव तैयार किए गए थे, किंतु निगम सदन की मंजूरी न मिलने या राजनीतिक असहमति के कारण वे ठंडे बस्ते में चले गए थे। मार्च 2025 में भी इस प्रकार का एक संशोधित प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद अब नए सिरे से इस दिशा में प्रशासनिक कवायद शुरू की गई है।

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