लखनऊ: बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहे गए अपशब्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने राजनीतिक स्तर में गिरावट पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पार्टियों से संविधान के अनुसार चलने और देशहित में काम करने का आग्रह किया है।
मायावती ने किसी का नाम लिए बिना, अभद्र टिप्पणियों की निंदा की और बाबा साहेब अम्बेडकर के संविधान के आदर्शों का पालन करने का आह्वान किया है। मायावती ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि देश में खासकर राजनैतिक स्वार्थ के कारण राजनीति का गिरता हुआ स्तर अति-दुखद एवं चिन्तनीय। उन्होंने कहा कि सभी पार्टियों की राजनीति पार्टी के संविधान के हिसाब से होनी चाहिए। यह देश और गरीबों के हित में होनी चाहिए। मायावती ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। उन्होंने आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का भी जिक्र किया।
अभद्र टिप्पणियों पर चिंता जताई
मायावती ने उच्च पदों पर बैठे लोगों के बारे में अभद्र टिप्पणियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे देश की छवि धूमिल होती है। इतना ही नहीं बल्कि देश के उच्च सरकारी और गौर-सरकारी संस्थाओं व विशेषकर राजनीति में उच्च पदों पर बैठे लोगों के बारे में जिस प्रकार की अभद्र, अशोभनीय, अमर्यादित व असंसदीय टिप्पणी सार्वजनिक तौर पर की जा रही है। इसके अलावा उनकी और देश की छवि को भी धूमिल करने के जो प्रयास किए जा रहे हैं, वह अति-दुखद व चिन्तनीय।
अम्बेडकरवादी सिद्धांत
मायावती ने कहा कि चुनाव के समय यह प्रक्रिया और भी अधिक विषैली हो जाती है। बिहार में जो कुछ देखने और सुनने को मिला है, वह देश की चिंता को बढ़ाने वाला है। बसपा चीफ ने अपनी पार्टी की विचारधारा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीएसपी 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' के अम्बेडकरवादी सिद्धांत पर चलती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी दूषित राजनीति के खिलाफ है। मायावती ने दूसरों से भी घिनौनी स्वार्थ की राजनीति से दूर रहने की उम्मीद जताई।
आकाश आनंद को दी बड़ी जिम्मेदारी
मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। बता दें कि मायावती ने हाल ही में अपने भतीजे आकाश आनंद को बड़ी जिम्मेदारी दी है। आकाश आनंद को बसपा में दूसरा सबसे बड़ा नेता बनाया गया है। पार्टी में कई अन्य बदलाव भी किए गए हैं। इन बदलावों को पार्टी को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। मायावती का लक्ष्य है कि बसपा एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए।

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