मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही, जहां शुरुआती मामूली बढ़त के बाद बिकवाली के दबाव ने बाजार की चमक फीकी कर दी। सुबह के समय सेंसेक्स में सौ अंकों से ज्यादा की तेजी देखी गई और निफ्टी भी 24,350 के स्तर को पार कर गया, लेकिन जल्द ही निवेशकों के सतर्क रुख और मुनाफावसूली के कारण सूचकांक लाल निशान में आ गए। सेंसेक्स करीब 160 अंकों की गिरावट के साथ 77,798 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं निफ्टी में भी तीस अंकों की सुस्ती दर्ज की गई। बाजार की इस अस्थिरता के बीच घरेलू मुद्रा में भी बड़ी कमजोरी देखी गई और रुपया डॉलर के मुकाबले फिसलकर 94.77 के स्तर पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित समझौतों की खबरों के बीच उपजा नाटकीय बदलाव रहा।
विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक तनाव का दोहरा दबाव
घरेलू शेयर बाजार पर इस समय वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली का गहरा साया बना हुआ है। एक्सचेंज के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी फंडों ने हाल ही में हजारों करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की है, जिससे बाजार की रिकवरी में बाधा आ रही है। पश्चिम एशिया के संकट और ईरान से जुड़ी खबरों ने निवेशकों को बेहद सावधान कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में निश्चित दिशा का अभाव दिख रहा है। बुधवार को बाजार में जो शानदार तेजी देखी गई थी, वह गुरुवार की सुबह बरकरार नहीं रह सकी क्योंकि विदेशी पूंजी का बाहर जाना बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और प्रमुख शेयरों की बदलती चाल
वैश्विक तेल बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू रही हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार पर दबाव बढ़ा है। इस अनिश्चितता के माहौल में शेयरों के प्रदर्शन में भी काफी भिन्नता देखी जा रही है। जहां एक ओर महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील और आईसीआईसीआई बैंक जैसे शेयर बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आईटी और फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनियों जैसे टीसीएस और सन फार्मा के शेयरों में कमजोरी का रुख बना हुआ है। एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिलने वाले सकारात्मक संकेतों के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रही हैं।
विशेषज्ञों का दृष्टिकोण और भविष्य की आर्थिक दिशा
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार वर्तमान में उम्मीद और आशंका के बीच झूल रहा है, जहां हर छोटी वैश्विक हलचल का असर कीमतों पर दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया के राजनीतिक घटनाक्रम और तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। हालांकि सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कुछ क्षेत्रों में दिख रही मजबूती से अल्पकालिक राहत मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि में स्थिरता तभी आएगी जब भू-राजनीतिक तनाव कम होगा और विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से कायम होगा। फिलहाल निवेशकों की नजरें ईरान की प्रतिक्रिया और ऊर्जा क्षेत्र की कीमतों पर टिकी हुई हैं।

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