नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की आगामी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से लगभग 30 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं के नाम बाहर होने की आशंका जताई जा रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत आगामी 24 अगस्त को प्रकाशित होने वाली इस ड्राफ्ट सूची में शहर के कुल 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 30 प्रतिशत हिस्से के शामिल न होने की संभावना है।
क्यों हो रही है नाम हटने की आशंका?
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में लगभग 32 प्रतिशत मतदाताओं के दस्तावेजों का भौतिक व तकनीकी सत्यापन होना अभी शेष है। एन्यूमरेशन (गणना) फॉर्म जमा करने तथा ऑनलाइन सबमिशन की निर्धारित प्रक्रिया 17 अगस्त को समाप्त हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं को बांटे गए फॉर्मों में से 30 प्रतिशत से अधिक फॉर्म अभी तक वापस एकत्र नहीं किए जा सके हैं, जबकि अब केवल गिने-चुने दिन ही शेष हैं। इसके पीछे मुख्य वजह मतदाताओं का अनुपस्थित होना, स्थान परिवर्तन (स्थानांतरित), मृत्यु या डुप्लीकेट प्रविष्टियां होना सामने आया है।
अस्पष्ट या गैर-एकत्रित फॉर्मों में से लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी उन मतदाताओं की है जो अपने पुराने पते से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके हैं। निर्वाचन अधिकारियों का स्पष्ट करना है कि ड्राफ्ट सूची से नाम हटने का यह अर्थ कतई नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम हमेशा के लिए मतदाता सूची से बाहर हो गया है।
दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मिलेगा अवसर
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दावे व आपत्तियां: प्रभावित मतदाता आगामी 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इस अवधि में नए पते पर पुनः नामांकन के लिए फॉर्म-6 भी भरा जा सकता है।
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अंतिम सूची का प्रकाशन: सभी आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन और प्रक्रियाओं के बाद पात्र मतदाताओं के नाम 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम वोटर लिस्ट में आधिकारिक तौर पर जोड़ दिए जाएंगे।
बता दें कि 14 अगस्त तक कुल 66.7 प्रतिशत एन्यूमरेशन फॉर्म पूरी तरह सत्यापित और डिजिटाइज किए जा चुके हैं। इस वर्ष जुलाई माह तक के आंकड़ों के अनुसार, पूरी दिल्ली में कुल 1,45,10,299 पंजीकृत मतदाता दर्ज हैं।
एसआईआर (SIR) की वर्तमान स्थिति रिपोर्ट
विशेष गहन पुनरीक्षण के चरण-3 का गणना चरण गत 30 जून 2026 से आरंभ हुआ था, जो 17 अगस्त 2026 तक निर्धारित है। 14 अगस्त की शाम को जारी आधिकारिक संचयी स्थिति रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान में लगातार प्रगति दर्ज की जा रही है। दिल्ली के सभी 13 प्रशासनिक जिलों में कुल 1.45 करोड़ से अधिक मतदाताओं को कवर करते हुए प्रत्येक नागरिक तक गणना फॉर्म वितरित किए गए, जिससे फॉर्म वितरण की दर शत-प्रतिशत (100%) रही है। इनमें से अब तक 96,85,155 फॉर्मों को सफलतापर्वक डिजिटाइज किया जा चुका है, जिससे कुल डिजिटाइजेशन का औसत 66.75% पहुंच गया है।
विभिन्न जिलों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो—
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उत्तरी और बाहरी जिले: बाहरी उत्तर जिले ने 75.60% के साथ सबसे बेहतरीन डिजिटाइजेशन दर दर्ज की है, जबकि पश्चिम (72.99%), दक्षिण-पश्चिम (72.89%), उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व (70.68%) ने भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।
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मध्यम प्रदर्शन वाले क्षेत्र: पुरानी दिल्ली (66.29%), उत्तर (63.71%), मध्य-उत्तर (68.63%), पूर्व (63.64%), मध्य (61.75%), दक्षिण और नई दिल्ली (लगभग 60.6%) जिलों ने मध्यम प्रगति दिखाई है।
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पिछड़ा क्षेत्र: दक्षिण-पूर्व जिला केवल 55.44% फॉर्म डिजिटाइजेशन के साथ इस सूची में थोड़ा पीछे चल रहा है।
यद्यपि फॉर्मों का वितरण का कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है, तथापि डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया अभी भी युद्धस्तर पर जारी है और गणना चरण के अंतिम दिनों में इसमें और अधिक तेजी आने की पूरी उम्मीद है।

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