कुआलालंपुर। नॉर्वे सरकार ने मलेशिया को दी जाने वाली आधुनिक ‘नेवल स्ट्राइक मिसाइल सिस्टम’ के एक्सपोर्ट (निर्यात) पर अचानक रोक लगा दी है। नॉर्वे के इस अप्रत्याशित फैसले ने न केवल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि मलेशिया को एक बड़ा आर्थिक और सैन्य नुकसान भी पहुंचाया है। मलेशियाई रक्षा मंत्री मोहम्मद खालिद नॉर्डिन ने जानकारी दी है कि उनकी सरकार ने नॉर्वे की हथियार निर्माता कंपनी ‘कोंग्सबर्ग डिफेंस एंड एयरोस्पेस’ को एक कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस के जरिए मलेशिया ने लगभग 251 मिलियन डॉलर (करीब 1 अरब मलेशियाई रिंगिट) के मुआवजे की मांग की है। मलेशिया इस सौदे के लिए पहले ही 95 फीसदी रकम का भुगतान कर चुका था, जिसके बाद ऐन वक्त पर लगी इस रोक से मलेशियाई सरकार बेहद नाराज है।
नॉर्वे ने क्यों रद्द किया मिसाइल सौदा?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने अपने इस फैसले पर सफाई देते हुए कहा है कि तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल को देखते हुए देश ने अपनी सैन्य और रक्षा तकनीकों के एक्सपोर्ट नियमों को काफी कड़ा कर दिया है। नॉर्वे की नई रक्षा नीति के मुताबिक, अब वह अपनी सबसे संवेदनशील और आधुनिक सैन्य तकनीकें केवल नाटो (NATO) के सदस्य देशों या अपने सबसे करीबी सहयोगियों को ही सप्लाई करेगा। चूंकि मलेशिया इस श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उसके एक्सपोर्ट लाइसेंस को रद्द कर दिया गया है।
मलेशिया का नौसैनिक आधुनिकीकरण अधर में लटका
नॉर्वे के इस कदम से मलेशिया का पूरा नौसैनिक आधुनिकीकरण कार्यक्रम (नेवल मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम) संकट में आ गया है। मलेशिया ने साल 2018 में कोंग्सबर्ग कंपनी के साथ अपने नए श्रेणी के युद्धपोतों को इस मिसाइल सिस्टम से लैस करने का समझौता किया था। अब स्थिति यह है कि मलेशियाई नौसेना को अपने जहाजों पर पहले से लगाए जा चुके मिसाइल माउंटिंग सिस्टम को हटाना पड़ेगा। इसके अलावा, युद्धपोतों के लिए किसी दूसरे देश से नया वैकल्पिक मिसाइल सिस्टम तलाशने और उसे जहाजों के डिजाइन के अनुसार फिट करने में मलेशिया को भारी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा और इसमें काफी समय भी बर्बाद होगा।
मलेशियाई प्रधानमंत्री ने जताई कड़ी आपत्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने नॉर्वे की इस कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर से फोन पर सीधी बातचीत करके अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। पीएम इब्राहिम ने सोशल मीडिया पर भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि दो देशों के बीच साइन किए गए आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट कोई हवा में उड़ाने वाले कागज के टुकड़े नहीं हैं, जिन्हें कोई भी देश अपनी मनमर्जी से रद्द कर दे। वहीं, रक्षा मंत्री खालिद नॉर्डिन ने इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और व्यापारिक नियमों में भरोसे की एक बड़ी कमी करार दिया है।

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