खाड़ी व्यापार में बड़ा बदलाव, UAE बना रहा है अत्याधुनिक नया बंदरगाह

दुबई। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को एक खतरनाक युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है। ईरान द्वारा इस संकरे समुद्री रास्ते को ब्लॉक करने की लगातार मिल रही धमकियों और बढ़ते हमलों के बीच, भारत के करीबी सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक बेहद महत्वाकांक्षी रणनीतिक योजना तैयार की है। यूएई ने अगले 18 महीनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह समाप्त कर तेल और माल ढुलाई के लिए एक नया, सुरक्षित मार्ग स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

दुबई की आर्थिक रीढ़ 'जेबेल अली पोर्ट' पर व्यापार 95% तक ठप

इस संकट का सबसे बड़ा झटका दुबई की आर्थिक शक्ति माने जाने वाले मध्य पूर्व के सबसे बड़े बंदरगाह 'जेबेल अली पोर्ट' को लगा है। होर्मुज स्ट्रेट में जारी नाकेबंदी के कारण जेबेल अली पोर्ट पर होने वाली व्यापारिक गतिविधियों में 90 से 95 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। इस विशाल बंदरगाह पर बड़े मालवाहक जहाजों (कार्गो शिप्स) का आवागमन लगभग पूरी तरह ठप हो चुका है। चूंकि जेबेल अली बंदरगाह पूरे यूएई की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए इस अभूतपूर्व संकट से निपटने के लिए दुबई की दिग्गज लॉजिस्टिक्स कंपनी 'डीपी वर्ल्ड' (DP World) ने एक बड़े मास्टरप्लान पर काम शुरू किया है।

ओमान की खाड़ी से लगते फुजैरा में बनेगा नया हाईटेक टर्मिनल

होर्मुज के खतरे को हमेशा के लिए टालने के लिए यूएई अब अपने पूर्वी तट पर, जो सीधे ओमान की खाड़ी से लगता है, एक बिल्कुल नया, आधुनिक और हाईटेक बंदरगाह तथा विशाल कंटेनर टर्मिनल बनाने जा रहे है।

  • नया केंद्र: यह नया मल्टीपर्पज पोर्ट फुजैरा में स्थापित किया जाएगा।

  • अस्थायी व्यवस्था: वर्तमान में डीपी वर्ल्ड ने जेबेल अली से हटाकर अपने ज्यादातर जहाजों को पूर्वी तट पर स्थित फुजैरा और 'खोर फक्कन' बंदरगाहों की तरफ मोड़ा है, जिसके कारण वहां समुद्र में जहाजों का भारी जाम (कंजेशन) लग गया है।

  • समय सीमा: बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फंडिंग और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो यह नया पोर्ट मात्र 18 महीने के रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हो सकता है। हालांकि, इसके अंतिम डिजाइन और वित्तीय आवंटन पर अभी अंतिम दौर की चर्चा जारी है। यूएई प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस नए पोर्ट के आने के बाद भी जेबेल अली का वैश्विक महत्व कम नहीं होगा।

व्यापारिक सुरक्षा के साथ-साथ 3,000 मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा

यूएई द्वारा इस वैकल्पिक मार्ग को तैयार करने की जल्दबाजी के पीछे सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर कारण भी है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के भड़कने के बाद से ईरान ने सीधे यूएई को निशाना बनाते हुए लगभग 3,000 घातक ड्रोन और विनाशकारी मिसाइलें दागी हैं। पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अकेले यूएई ने इस युद्ध के दौरान सबसे अधिक हवाई हमलों का सामना किया है, जिसके चलते अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए यूएई को होर्मुज के दायरे से बाहर निकलना अनिवार्य हो गया है।