जबलपुर (मध्य प्रदेश)। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से एक बार फिर बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय लेते हुए बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक को फिर से बहाल कर दिया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने उनकी उस मुख्य याचिका को भी पुनर्जीवित (बहाल) कर दिया है, जिसे तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया था। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यह नया आदेश जारी किया है, जिससे टीएमसी सांसद को तात्कालिक कानूनी सुरक्षा कवच मिल गया है।
वकील की अनुपस्थिति के कारण 17 जून को खारिज हो गई थी याचिका, हट गई थी राहत
इस मामले में मोड़ तब आया था जब बीते 17 जून 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी या उनके पक्ष का कोई भी अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ था। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने माना था कि याचिकाकर्ता इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का इच्छुक नहीं है। परिणाम स्वरूप, कोर्ट ने बनर्जी की याचिका को खारिज करते हुए उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक को हटा लिया था, जिससे उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया था। हालांकि, अब एकल पीठ ने अपने पूर्व के उस सख्त आदेश को पलटते हुए याचिकाकर्ता को दोबारा राहत प्रदान की है।
क्या है विवाद? आकाश विजयवर्गीय को 'गुंडा' कहने पर भोपाल में दर्ज हुआ था मुकदमा
यह पूरा विवाद साल 2020 का है, जब कोलकाता में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और इंदौर के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय को कथित तौर पर 'गुंडा' कहकर संबोधित किया था। इस सार्वजनिक बयान को अपनी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा पर गहरा आघात बताते हुए आकाश विजयवर्गीय ने साल 2021 में भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) में बनर्जी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
एमपी-एमएलए कोर्ट के वारंट को दी थी चुनौती; फिलहाल टली गिरफ्तारी
भोपाल की निचली अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद टीएमसी सांसद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इस वारंट के विरोध में अभिषेक बनर्जी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की शरण ली थी। उनके वकीलों ने तर्क दिया था कि वे एक जिम्मेदार सांसद हैं और उनके कानून से भागने की कोई आशंका नहीं है। हाई कोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर पहली बार 12 नवंबर 2025 को गिरफ्तारी वारंट पर अंतरिम रोक लगाई थी। अब ताजा आदेश के बाद हाई कोर्ट से मिली वह राहत आगे भी बरकरार रहेगी और आगामी सुनवाई तक पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।

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