साइबर फ्रॉड पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 4.98 करोड़ की ठगी में तीन गिरफ्तार

कल्याणपुर। रुद्र समागम सेवा एवं शिक्षा समिति के सचिव को झांसा देकर लखनऊ में बंधक बनाने और उनके बैंक खाते से करीब 4.98 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन करने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात में शामिल तीन आरोपियों को लखनऊ क्षेत्र से धर दबोचा है. पकड़े गए बदमाशों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस जल्द ही इस पूरे मामले का आधिकारिक खुलासा कर सकती है. इस घटना को अंजाम देने वाले चौथे फरार आरोपी की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं.

डोनेशन का झांसा देकर लखनऊ में बनाया बंधक

कल्याणपुर के नवशील धाम फेज-2 के रहने वाले संस्था सचिव आशीष कुमार सिंह ने कुछ दिनों पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. पीड़ित के मुताबिक, उनकी समिति का खाता बिठूर स्थित एक्सिस बैंक में है, जिसके मैनेजर ने उनकी मुलाकात लखनऊ के राहुल नाम के एक व्यक्ति से करवाई थी. राहुल ने संस्था को बड़ा डोनेशन (दान) देने का वादा किया और जरूरी कागजी कार्रवाई के बहाने आशीष को वैधानिक दस्तावेजों के साथ लखनऊ बुलाया. जब पीड़ित सुल्तानपुर रोड स्थित एक रिसॉर्ट पहुंचे, तो वहां मौजूद राहुल, इमरान और उनके साथियों ने उन्हें बंधक बना लिया. आरोपियों ने पीड़ित का मोबाइल फोन छीनकर उनके खाते से करोड़ों रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन कर डाला और जान से मारने की धमकी देकर उन्हें छोड़ा.

साइबर सेल को मिली 4000 पन्नों की रिपोर्ट

इस महाघोटाले और धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब साइबर सेल को एनसीआरपी पोर्टल के जरिए एक विस्तृत रिपोर्ट हासिल हुई. बिठूर स्थित बैंक शाखा में खुले इस संस्था के खाते में देश भर से संदिग्ध ट्रांजेक्शन हो रहे थे, जिसे लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से साइबर अपराध की 54 शिकायतें दर्ज कराई गई थीं. शुरुआती जांच के आधार पर जब पुलिस ने संस्था सचिव आशीष को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तब जाकर इस पूरी साजिश और बंधक बनाए जाने की कहानी से पर्दा उठा. इसके बाद पीड़ित सचिव की तहरीर पर पुलिस ने नामजद एफआईआर दर्ज की.

आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिसिया कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई की. रविवार रात को घेराबंदी करते हुए लखनऊ के इलाके से तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि इस रैकेट के नेटवर्क और बाकी बचे हुए आरोपी का पता लगाया जा सके. इस धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है.