CBSE का बड़ा कदम: युद्ध प्रभावित देशों के छात्रों के लिए विशेष नीति पर विचार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देश की शीर्ष अदालत को सूचित किया कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के प्रभावित निजी विद्यार्थियों के हित में एक व्यापक नीति बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। ये वे छात्र हैं जिनके केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के परीक्षा परिणाम भू-राजनीतिक तनाव, क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण रोके गए हैं या घोषित नहीं हो सके हैं। सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को आश्वस्त किया कि यह समस्या किसी एक व्यक्तिगत छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में पढ़ रहे अनेक विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा एक संवेदनशील और व्यापक मामला है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे तमाम प्रभावित छात्र-छात्राओं के लिए एक समान और न्यायसंगत नीति तैयार कर रही है, जिस पर बहुत जल्द अंतिम मुहर लगा दी जाएगी।

अवकाशकालीन पीठ के समक्ष हुई महत्वपूर्ण सुनवाई

न्यायालय के भीतर इस बेहद महत्वपूर्ण मामले पर जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस विजय बिश्नोई की वेकेशन बेंच (अवकाशकालीन पीठ) के समक्ष विस्तृत बहस हुई। सॉलिसिटर जनरल की दलीलों और केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए शीर्ष अदालत ने मामले की अगली विधिक सुनवाई के लिए आगामी 22 जून 2026 की तारीख निर्धारित कर दी है। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि अगली सुनवाई की तिथि तक सरकार प्रभावित बच्चों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने वाली अपनी प्रस्तावित गाइडलाइन के साथ अदालत के समक्ष उपस्थित होगी।

सऊदी अरब के छात्र की याचिका से सामने आया मामला

सीबीएसई परिणामों से जुड़ा यह पूरा विवाद मूल रूप से सऊदी अरब में रहकर पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल द्वारा दायर की गई एक विशेष रिट याचिका के बाद उजागर हुआ है। पीड़ित छात्र ने अपनी कानूनी अर्जी में सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाई थी कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को उसका कक्षा 12वीं का इंप्रूवमेंट (अंक सुधार) परीक्षा का रुका हुआ परिणाम तुरंत जारी करने का आदेश दे ताकि उसका पूरा साल बर्बाद होने से बच सके।

विदेशी केंद्रों पर सुरक्षा और समन्वय का संकट

शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम एशिया के कई देशों में चल रहे आंतरिक और बाहरी सैन्य गतिरोध के कारण कई परीक्षा केंद्रों पर कॉपियों के मूल्यांकन, सुरक्षित डेटा ट्रांसफर और प्रशासनिक समन्वय में भारी तकनीकी बाधाएं आई थीं। केंद्र सरकार अब सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसा वैकल्पिक मार्ग तलाश रही है जिसके तहत इन विशेष परिस्थितियों वाले छात्रों को अन्य सामान्य विद्यार्थियों की तरह ही समय पर परिणाम मिल सके और वे उच्च शिक्षा के लिए आगामी सत्र में देश-विदेश के विश्वविद्यालयों में सुचारू रूप से दाखिला ले सकें।