वाशिंगटन। खगोलविदों ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अब तक के सबसे कम उम्र के ग्रह को खोजने का दावा किया है। इस नवजात ग्रह की उम्र महज दस लाख साल से भी कम आंकी गई है। वैज्ञानिकों ने इस अनोखे ग्रह का नाम 'एलियास 2-24 बी' (Elias 2-24 b) रखा है, जो वर्तमान में अपने युवा तारे के चारों ओर मौजूद गैस और धूल की विशाल डिस्क के भीतर बहुत तेजी से परिक्रमा कर रहा है।
विशਾਲ आकार और पृथ्वी से दूरी
खगोलविदों के मुताबिक, इस नए खोजे गए ग्रह का आकार हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह यानी 'बृहस्पति' के बराबर है। यह अंतरिक्ष में पृथ्वी से करीब 450 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। इस खोज के सामने आने के बाद ग्रहों के निर्माण को लेकर वैज्ञानिकों के अब तक के कई स्थापित मॉडल सवालों के घेरे में आ गए हैं। अब तक जिन सबसे युवा ग्रहों की पहचान की गई थी, उनकी न्यूनतम उम्र करीब 50 लाख वर्ष मानी जाती थी, जिनमें 'पीडीएस 70' और 'विस्पिट 2' जैसे तारों की परिक्रमा करने वाले ग्रह शामिल हैं। इसके मुकाबले एलियास 2-24 बी की उम्र एक मिलियन (दस लाख) वर्ष से भी कम है, जिसने वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इतनी अल्प आयु में यह ग्रह इतना विशाल आकार कैसे ले सका।
तारे के चारों ओर घनी डिस्क और खोज की चुनौती
इस ग्रह को तलाशना वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं था। किसी भी नए तारे के जन्म के समय उसके चारों तरफ गैस, धूल और बर्फ की एक बहुत घनी डिस्क यानी परत बन जाती है, जिससे धीरे-धीरे ग्रहों का निर्माण होता है। हालांकि, यह घनी और भारी डिस्क वैज्ञानिकों के लिए नवजात ग्रहों को सीधे तौर पर देख पाना बेहद कठिन बना देती है। हवाई में स्थित प्रसिद्ध 'डब्ल्यू. एम. केक वेधशाला' के कोरोनाग्राफ की मदद से वैज्ञानिकों ने तारे की अत्यधिक तेज रोशनी को ब्लॉक किया और उसके आसपास की बेहद धुंधली वस्तुओं का बारीकी से अध्ययन किया।
इस खोज की पृष्ठभूमि लगभग एक दशक पुरानी है। सबसे पहले चिली में स्थित 'अल्मा दूरबीन' ने एलियास 2-24 तारे के इर्द-गिर्द मौजूद डिस्क में एक बड़ा खाली क्षेत्र देखा था। इसके बाद 'वेरी लार्ज टेलीस्कोप' ने इसी खाली इलाके में रोशनी का एक बेहद हल्का सा बिंदु दर्ज किया। उस समय यह साफ नहीं हो पाया था कि वह कोई ग्रह है या कोई अन्य खगोलीय संरचना। आखिरकार, शोधकर्ताओं ने साल 2018 और 2020 के पुराने अभिलेखीय डेटा का दोबारा गहराई से विश्लेषण किया। अलग-अलग समय पर उस चमकीले बिंदु की स्थिति और उसकी गति का मिलान करने के बाद वैज्ञानिकों ने आखिरकार इसके एक वास्तविक ग्रह होने की पुष्टि कर दी।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों है यह खोज खास?
शोधकर्ताओं के अनुसार, एलियास 2-24 बी अपने केंद्रीय तारे से पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी की तुलना में लगभग 55 गुना अधिक दूरी पर परिक्रमा कर रहा है। यह अभूतपूर्व खोज ग्रह निर्माण की प्रक्रिया को नए सिरे से समझने में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान वैज्ञानिक मॉडल इतनी कम समय सीमा में इतनी अधिक दूरी पर बृहस्पति जैसे भारी-भरकम ग्रह के निर्माण को पूरी तरह से समझाने में असमर्थ महसूस करते हैं। यही वजह है कि एलियास 2-24 बी वैज्ञानिकों को ग्रहों के जन्म के शुरुआती चरणों को बेहद करीब से समझने का एक दुर्लभ और अनमोल अवसर प्रदान करता है। भविष्य में नासा का 'नैन्सी ग्रेस रोमन अंतरिक्ष दूरबीन' इस प्रकार के अनगिनत युवा ग्रहों को ढूंढने में वैज्ञानिकों की और अधिक मदद करेगा।

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