टीम इंडिया की चोटों पर बड़ा फैसला, BCCI करेगा फिटनेस मानकों और ट्रेनिंग सिस्टम की समीक्षा

भारतीय क्रिकेट टीम के आगामी श्रीलंका दौरे से ठीक पहले कप्तान शुभमन गिल के चोटिल हो जाने से टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में अभ्यास सत्र के दौरान कप्तान गिल के दाहिने हाथ की अंगुली पर चोट लग गई थी। इसके तुरंत बाद मेडिकल टीम ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया, जिसके कुछ देर बाद वे दोबारा नेट्स पर तो लौटे, लेकिन फील्डिंग अभ्यास के दौरान उनके हाथ में फिर से चोट लग गई। इसके चलते उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा और मेडिकल टीम ने एहतियात के तौर पर उन्हें दोबारा मैदान पर उतरने की अनुमति नहीं दी। स्थिति यह रही कि वे श्रीलंका के खिलाफ खेले जाने वाले वार्म-अप मैच के पहले दिन फील्डिंग करने के लिए भी मैदान पर नहीं उतरे।

कप्तान गिल की यह चोट ऐसे समय में सामने आई है, जब भारतीय क्रिकेट सर्किट में खिलाड़ियों की फिटनेस, वर्कलोड मैनेजमेंट और फिजियो से जुड़े मुद्दों को लेकर बहस गरमाई हुई है। पिछले आठ महीनों के भीतर लगभग 10 प्रमुख भारतीय खिलाड़ियों के चोटिल होने के मामलों के बाद, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भी अपनी मौजूदा फिटनेस व्यवस्था की आंतरिक समीक्षा करने की गंभीर तैयारी कर रहा है।

पिछले आठ महीनों में 10 खिलाड़ी हुए चोटिल, BCCI सख्त

भारतीय टीम में पिछले आठ महीनों के अल्प काल में करीब 10 खिलाड़ियों के चोटग्रस्त होने की खबरें सामने आई हैं। इन खिलाड़ियों में जसप्रीत बुमराह, कप्तान शुभमन गिल, ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या और तेज गेंदबाज हर्षित राणा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने की इस प्रवृत्ति ने टीम की पूरी फिटनेस व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और सपोर्ट स्टाफ के बीच भी इस गंभीर मुद्दे पर लंबी चर्चा हो चुकी है। बीसीसीआई अब खिलाड़ियों की फिटनेस और चोट प्रबंधन व्यवस्था की उच्च स्तरीय आंतरिक समीक्षा कराने जा रहा है, जिसके बाद बोर्ड वर्तमान फिटनेस मानकों में बड़े बदलाव करने का फैसला ले सकता है।

फिजियो और फिटनेस सेटअप पर उठे गंभीर सवाल

भारतीय खिलाड़ियों के लगातार अनफिट होने के बीच टीम का फिजियोथेरेपी और फिटनेस सेटअप भी सीधे तौर पर संदेह के घेरे में आ गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अत्यधिक व्यस्त और लंबे कार्यक्रमों के बीच खिलाड़ियों को शारीरिक रूप से पूरी तरह तैयार रखने के लिए बोर्ड अब नए सिरे से कड़े फिटनेस मानक तय करने पर विचार कर रहा है।

बीसीसीआई ने फिटनेस के स्तर में आई गिरावट और खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने के मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया है। बोर्ड की समीक्षा बैठकों में उन तमाम कारणों पर गहराई से मंथन किया जा रहा है, जो टीम के प्रदर्शन और खिलाड़ियों की फिटनेस को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहे हैं।

बुमराह की फिटनेस से लेकर राणा के वजन तक पर चर्चा

भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण की रीढ़ माने जाने वाले जसप्रीत बुमराह की फिटनेस भी पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। श्रीलंका दौरे से ठीक पहले उनकी उपलब्धता और मैच-फिटनेस को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। वहीं दूसरी ओर, युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा के बढ़े हुए वजन को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले टी20 विश्व कप से ठीक पहले राणा का वजन लगभग चार किलोग्राम बढ़ गया था, जिसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत कर अपना वजन नियंत्रित किया था। हालांकि, मौजूदा समय में उनका वजन फिर से बढ़ने की बात सामने आई है, जिससे खिलाड़ियों के जमीनी फिटनेस स्तर को लेकर टीम प्रबंधन की चिंताएं और अधिक गहरी हो गई हैं।

अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सका 'ब्रोंको टेस्ट'

भारतीय टीम में खिलाड़ियों की फिटनेस मापने के लिए 'ब्रोंको टेस्ट' (Bronco Test) को लेकर भी लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं। पिछले साल टीम के स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच ने इस टेस्ट को अनिवार्य रूप से लागू करने की पहल की थी, लेकिन उस समय इसके लिए कोई ठोस और अंतिम मानक तय नहीं हो पाए थे। नई जानकारियों के अनुसार, ब्रोंको टेस्ट के लिए मानक तो तैयार किए गए थे, लेकिन खिलाड़ियों के वर्तमान प्रदर्शन और वर्कलोड को देखते हुए उन्हें कुछ हद तक हल्का कर दिया गया।

बीसीसीआई ने फिटनेस टेस्ट के तहत पुरुष क्रिकेटरों के लिए समय सीमा 5.15 से 5.20 मिनट तय की थी, जबकि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) ने दो किलोमीटर की दौड़ को पूरा करने के लिए 9 से 10 मिनट का समय निर्धारित किया है। हालांकि, कड़े विरोध और असहजता के चलते यह फिटनेस टेस्ट अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है।

'हर चुनौती के लिए तैयार रहो' — कोच गौतम गंभीर का संदेश

श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से ठीक पहले भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने सभी खिलाड़ियों से हर विपरीत परिस्थिति के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहने को कहा है। उन्होंने एक विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से स्पष्ट किया कि टीम को आगामी अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का डटकर सामना करना होगा।

कोच गंभीर ने खिलाड़ियों को निर्देशित किया कि उन्हें हर मुश्किल सवाल का मैदान पर अपने प्रदर्शन से जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीम को हर बाधा को पार करना होगा और 15 अगस्त की सुबह तक खुद को पूरी तरह सर्वश्रेष्ठ स्थिति में रखना होगा। ऐसे में, कप्तान शुभमन गिल की इस अचानक चोट ने टीम की तैयारियों के बीच एक नई चिंता जरूर पैदा कर दी है। अब पूरे देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भारतीय कप्तान कितनी जल्दी अपनी चोट से उबरकर पूरी तरह फिट होकर मैदान पर वापसी करते हैं।

पिछले आठ महीनों में चोटिल होने वाले प्रमुख खिलाड़ियों की सूची

हाल के महीनों में भारतीय क्रिकेट टीम के कई बड़े खिलाड़ी अलग-अलग समय पर चोटों का शिकार हुए हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:

  • शुभमन गिल: श्रीलंका दौरे पर अभ्यास सत्र के दौरान दाहिने हाथ के अंगूठे में चोट।

  • जसप्रीत बुमराह: घुटने की समस्या के कारण श्रीलंका दौरे से बाहर होने की स्थिति।

  • हार्दिक पांड्या और आकाश दीप: विभिन्न चोटों के चलते फिलहाल टीम से बाहर चल रहे हैं।

  • हर्षित राणा: इंग्लैंड दौरे के दौरान चोटिल होने के बाद हाल ही में वापसी की है।

  • साई सुदर्शन: अंगूठे में चोट लगने और समय पर फिट न होने के कारण बाहर हुए।

  • वॉशिंगटन सुंदर: इंग्लैंड दौरे के दूसरे एक दिवसीय मैच के दौरान चोटिल हो गए थे।

  • विराट कोहली: इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान उंगली की चोट की समस्या से जूझे।

  • रवींद्र जडेजा: आईपीएल के दौरान लगी आंतरिक चोट से उबरने के बाद अब श्रीलंका सीरीज के लिए लौटे हैं।

क्या अब और सख्त होंगे फिटनेस के नियम?

खिलाड़ियों में लगातार आ रही चोटों की समस्याओं के बीच बीसीसीआई आने वाले दिनों में फिटनेस नियमों में आमूल-चूल बदलाव कर सकता है। रिपोर्ट्स के संकेत हैं कि भविष्य में चोटिल खिलाड़ियों की फिटनेस जांच पहले के मुकाबले काफी ज्यादा सख्त और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। इसके अलावा, किसी भी चोटिल खिलाड़ी को मैच खेलने के लिए फिट घोषित करने से पहले अलग-अलग दिनों में दो बार 'ब्रोंको टेस्ट' पास करना अनिवार्य किया जा सकता है। साथ ही, हर छह महीने में सभी अनुबंधित खिलाड़ियों की व्यापक फिटनेस जांच करने की योजना है। शिविर में हिस्सा लेने आने वाले हर खिलाड़ी का ब्रोंको टेस्ट कराया जाएगा और उसके परिणामों के आधार पर ही उनका व्यक्तिगत ट्रेनिंग शेड्यूल तैयार किया जाएगा।