September 19, 2026

ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला: विदेशी कर्मचारियों को लाने वाले नियोक्ताओं पर शुल्क रहेगा जारी

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी (H-1B) वीजा के जरिए विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाने वाले नियोक्ताओं पर लगने वाले 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) के भारी-भरकम शुल्क को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी श्रम बाजार और स्थानीय कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है।

92 प्रतिशत तक घटी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों की पंजीकरण संख्या

राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि साल 2025 में 1 लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले के बाद से बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों की तरफ से एच-1बी वीजा के लिए होने वाले पंजीकरण में 92 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस प्रतिबंध को एक साल और बढ़ाने से देश के आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को मजबूती मिलेगी, जिससे अमेरिकी नागरिकों और स्थानीय स्नातकों को रोजगार बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

भारतीय नागरिकों पर सबसे ज्यादा असर

ज्ञात हो कि अमेरिकी एच-1बी वीजा कार्यक्रम से सबसे ज्यादा लाभान्वित होने वाला समूह भारतीय नागरिक ही हैं। हालांकि, 2025 में लाए गए इस 1 लाख डॉलर के शुल्क संबंधी फैसले को लेकर कानूनी चुनौतियां भी सामने आई हैं, और फिलहाल यह मामला दो अलग-अलग संघीय अदालतों में विचाराधीन है।

किन लोगों पर लागू नहीं होगा यह आदेश?

यह सख्त शुल्क आदेश उन विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता है जो पहले से ही छात्र (Student) वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और नए एच-1बी वीजा के लिए आवेदन कर रहे हैं (इस श्रेणी में ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक है)। इसके अलावा, यह शुल्क पहले से जारी वीजा के नवीनीकरण (Renewal) पर भी लागू नहीं किया गया है।

और अधिक सख्त होगी वीजा आवेदनों की जांच

इस बार प्रशासन ने एच-1बी वीजा प्रक्रिया को लेकर कई कड़े प्रावधान किए हैं:

  • श्रम मंत्री को निर्देश: श्रम मंत्री को 30 दिन की समय सीमा दी गई है ताकि वे पहले जमा किए गए श्रम स्थिति आवेदनों (LCA) के आंकड़ों की समीक्षा कर सकें और नियोक्ताओं के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय कर सकें।

  • एजेंसियों के बीच तालमेल: विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय को बेहतर कर उन आवेदनों की विशेष रूप से कड़ी जांच के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी या उन्हें नौकरी से हटाने का जोखिम अधिक हो।

  • नियोक्ताओं का रिकॉर्ड: वीजा आवेदनों पर विचार करते समय अधिकारी यह भी जांचेंगे कि क्या संबंधित नियोक्ता ने हाल ही में अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है या भविष्य में ऐसी कोई छंटनी की योजना बनाई है।

ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कुछ नियोक्ताओं और तीसरे पक्ष के आउटसोर्सिंग समूहों ने इस वीजा कार्यक्रम का दुरुपयोग करते हुए अमेरिकी कुशल श्रमिकों की उपलब्धता को कम किया है, जिस पर रोक लगाना बेहद जरूरी है।