October 5, 2026

भारती दिल्ली इंपोरियम को लेकर बड़ा बदलाव, निजी एजेंसी संभालेगी संचालन और मैनपावर

नई दिल्ली| राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनाट प्लेस के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित दिल्ली सरकार के प्रसिद्ध 'भारती दिल्ली इंपोरियम' के संचालन और प्रबंधन को अब पूरी तरह से निजी एजेंसी के हाथों में सौंपने की बड़ी तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (DSIIDC) ने इंपोरियम के कुशल संचालन, संपूर्ण बिक्री व्यवस्था और मैनपावर (कर्मचारी) प्रबंधन के लिए कुछ विशिष्ट शर्तों के तहत आधिकारिक निविदा (टेंडर) आमंत्रित की है। इसके तहत चयनित होने वाली निजी एजेंसी को हर साल दिल्ली सरकार को न्यूनतम चार करोड़ रुपये की गारंटीशुदा बिक्री आमदनी (रेवेन्यू) देनी होगी।

इंपोरियम का दायरा और तीन साल का अनुबंध

स्टेट इंपोरिया बिल्डिंग के भीतर बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और मेजेनाइन फ्लोर को मिलाकर यह इंपोरियम लगभग सात हजार वर्गफुट के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। जारी निविदा के प्रावधानों के अनुसार, इस प्रतिष्ठित इंपोरियम का संचालन आगामी तीन वर्षों की अवधि के लिए किसी निजी एजेंसी को सौंपा जाएगा। हालांकि, एजेंसी के कार्य प्रदर्शन और बिक्री के आंकड़ों की समीक्षा के बाद इस अनुबंध को दो साल और आगे बढ़ाया जा सकता है।

एजेंसी के लिए न्यूनतम सालाना बिक्री का लक्ष्य चार करोड़ रुपये तय किया गया है, और इस लक्ष्य में प्रत्येक वर्ष पाँच प्रतिशत की स्वतः (ऑटोमैटिक) बढ़ोतरी होती जाएगी। इस प्रकार, चुनी गई निजी एजेंसी पर लगातार अपने कारोबार और बिक्री के स्तर को बढ़ाने का भारी दबाव बना रहेगा।

वर्ष 1975 से स्थापित है ऐतिहासिक एम्पोरियम

कनाट प्लेस के इस प्रमुख परिसर में 'भारती दिल्ली एम्पोरियम' की स्थापना वर्ष 1975 में की गई थी, जिसके बाद से इसके सुचारू संचालन और रखरखाव की मुख्य जिम्मेदारी DSIIDC को सौंपी गई थी। कुल तीन मंजिलों में विकसित इस भव्य एम्पोरियम में पारंपरिक साड़ियों, डिजाइनर कपड़ों, सुंदर कालीनों, गर्म शॉल, पीतल के कलात्मक सामान, उत्कृष्ट हथकरघा उत्पादों, चमड़े की आकर्षक वस्तुओं, पेंटिंग्स, लकड़ी की नक्काशी, जरदोजी के वस्त्र, संगमरमर की नायाब कलाकृतियों, सफेद धातु और अन्य तमाम प्रकार के बेशकीमती हस्तशिल्प उत्पाद उपलब्ध रहते हैं। इस केंद्र पर कुल 19 अलग-अलग श्रेणियों के बेहतरीन उत्पाद कला प्रेमियों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए रखे जाते हैं।

40 प्रतिशत प्राइम स्पेस का होगा व्यावसायिक उपयोग

इस नई व्यवस्था के तहत इंपोरियम के स्थान के इस्तेमाल को लेकर भी एक बहुत महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। इसके कुल क्षेत्रफल का 60 प्रतिशत हिस्सा पारंपरिक हस्तशिल्प और कला से जुड़ी गतिविधियों के लिए पूरी तरह आरक्षित रखा गया है, जबकि शेष 40 प्रतिशत प्राइम जगह का व्यावसायिक (कमर्शियल) इस्तेमाल किया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि इस व्यावसायिक बदलाव से इंपोरियम में समग्र कारोबार और बिक्री के दायरे में भारी विस्तार होगा, जबकि स्थानीय कारीगरों और उनके हस्तशिल्प उत्पादों के लिए तय हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित बना रहेगा। इसके साथ ही, सरकार के निर्देशों के तहत हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त (अवार्डी) कलाकारों के लिए 10 प्रतिशत विशेष स्थान पूरी तरह आरक्षित रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निजी एजेंसी को प्रबंधन सौंपे जाने के बावजूद इस ऐतिहासिक इंपोरियम की मूल पहचान और पारंपरिक कारीगरों से इसका जुड़ाव हमेशा बरकरार रहे।

स्टाफ की तैनाती से लेकर सुरक्षा तक की जिम्मेदारी एजेंसी की

नियोजित व्यवस्था के तहत चुनी गई निजी एजेंसी को ही अपनी लागत पर बिक्री कर्मचारियों, कैशियर, अकाउंटेंट और सुरक्षा गार्डों की तैनाती करनी होगी। कर्मचारियों को दिए जाने वाले न्यूनतम वेतन, कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) और भविष्य निधि (PF) समेत सभी वैधानिक और श्रम संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन भी पूरी तरह से एजेंसी को ही करना होगा।

इसका सीधा अर्थ यह है कि DSIIDC को इंपोरियम के रोजमर्रा के कामकाज, प्रशासनिक संचालन और मैनपावर के बोझ से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। हालांकि, निजी हाथों में संचालन जाने के बावजूद बिक्री से प्राप्त होने वाली पूरी धनराशि सीधे तौर पर DSIIDC के आधिकारिक बैंक खाते में ही जमा कराई जाएगी, जिसके बाद निगम द्वारा तय शर्तों के आधार पर एजेंसी को उसका हिस्सा भुगतान किया जाएगा।

स्वामित्व रहेगा सरकार का, केवल संचालन होगा निजी

दिल्ली सरकार और संबंधित विभाग की ओर से यह बात पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है कि इस इंपोरियम को निजी हाथों में सौंपने का कतई यह अर्थ नहीं है कि इसका मालिकाना हक (स्वामित्व) किसी निजी कंपनी को ट्रांसफर किया जा रहा है। प्रस्ताव के नियमों के अनुसार, इंपोरियम का मालिकाना हक पूरी तरह सरकार के पास सुरक्षित रहेगा, और केवल इसके व्यावसायिक संचालन, बिक्री प्रबंधन और मैनपावर व्यवस्था की जिम्मेदारी ही एक तय अनुबंध के तहत निजी एजेंसी को सौंपी जा रही है।