वीजा फ्रॉड केस में ED का बड़ा एक्शन, फर्जी बैंक फंड और सोने की ईंट की गुत्थी सुलझाने में जुटी जांच

नई दिल्ली:प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने संगठित इमिग्रेशन और वीजा धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ अपनी कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के सख्त प्रावधानों के तहत जालंधर की स्पेशल कोर्ट में एक व्यापक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (आरोप पत्र) दायर की है।

यह बड़ी कार्रवाई रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड, अमनदीप सिंह, पूनम रानी, अंकुर कुमार केहर, नितिन विज, कमलजोत कंसल सहित उनके विदेशी सहयोगियों (ओवरसीज पार्टनर) और रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज के खिलाफ की गई है। इन सभी पर अमेरिका का स्टूडेंट और विजिटर वीजा दिलाने के नाम पर भोले-भाले आवेदकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने और उस अवैध काली कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को ठिकाने लगाने (लॉन्डर करने) का संगीन आरोप है।

नई दिल्ली: अमेरिकी दूतावास की शिकायत पर खुली पोल, पंजाब और दिल्ली पुलिस की एफआईआर से शुरू हुई थी जांच

 इस सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ तब हुआ जब नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस संबंध में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पंजाब पुलिस और दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जाली दस्तावेज तैयार करने के कई आपराधिक मुकदमे दर्ज किए थे। इन्हीं प्राथमिकियों (केस) के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर अपनी तफ्तीश शुरू की थी।

जांच में सामने आया कि यह पूरा गिरोह अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को वीजा दिलाने के लिए जाली एजुकेशनल सर्टिफिकेट, मनगढ़ंत कार्य अनुभव प्रमाण पत्र, फर्जी बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय रूप से सक्षम होने के झूठे फंड प्रूफ तैयार करने की एक गहरी आपराधिक साजिश में लिप्त था।

धोखाधड़ी का अनूठा तरीका: खाते में दिखाते थे 40 लाख रुपये, कुछ ही मिनटों में कर देते थे गायब

जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने वीजा पाने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपना रखा था। वे ऐसे वीजा आवेदकों को अपना निशाना बनाते थे जिनके पास विदेश जाने के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता या पर्याप्त बैंक बैलेंस नहीं होता था।

इस पात्रता की कमी को छुपाने के लिए आरोपियों ने आवेदकों से प्रति व्यक्ति लगभग 40,000 रुपये की फीस वसूली। इसके बदले में वे आवेदकों के बैंक खातों में अस्थाई रूप से कुछ मिनटों के लिए करीब 40 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर करते थे, ताकि वीजा अधिकारियों को फंड का नकली सबूत (फाइनेंशियल स्टेटमेंट) दिखाया जा सके। जैसे ही बैंक स्टेटमेंट का स्क्रीनशॉट या प्रिंट लिया जाता, आरोपी तुरंत उस पैसे को खाते से वापस निकाल लेते थे। जांच में ऐसे 154 वीजा आवेदकों का पता चला है जिन्हें इस फर्जी फंड सिस्टम का हिस्सा बनाया गया था। इसके अलावा, विदेशी विश्वविद्यालयों और दूतावास के अधिकारियों के साथ होने वाली पूरी ईमेल बातचीत को भी आरोपी अपने ही नियंत्रित ईमेल अकाउंट्स से संचालित करते थे।

फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र का खेल: इन्फोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन ने बेचे नकली सर्टिफिकेट

ईडी की तफ्तीश में यह भी प्रमाणित हुआ है कि कमलजोत कंसल द्वारा संचालित की जा रही इन्फोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन नामक कंपनी इस रैकेट के लिए टेक्निकल बैकअप का काम कर रही थी। इस कंपनी ने उन आवेदकों के लिए जाली ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और झूठे अनुभव प्रमाण पत्र (एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट) तैयार किए, जिन्होंने कभी कहीं कोई नौकरी या प्रशिक्षण नहीं लिया था।

जांच के दौरान जब्त की गई सीक्रेट डायरियों और डिजिटल रिकॉर्ड से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि नकद पैसों के अवैध लेनदेन के बदले में ये फर्जी रोजगार दस्तावेज धड़ल्ले से छापे जा रहे थे।

करोड़ों की संपत्तियां कुर्क: सोने की ईंट, डिजिटल डिवाइस और लाखों रुपये कैश जब्त

इस मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ईडी ने एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों और लॉकरों को खंगाला गया, जहां से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक डिजिटल सबूत, बेहिसाबी वित्तीय लेनदेन की डायरियां, 19 लाख रुपये की बिना हिसाब वाली भारतीय नकदी और करीब 1 किलोग्राम वजन की सोने की एक ईंट बरामद कर जब्त की गई। इस पूरी वीजा धोखाधड़ी से अर्जित की गई अवैध काली कमाई को आरोपियों द्वारा वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की जा रही थी, जिसे ईडी ने नाकाम कर दिया है।

ईडी की कार्रवाई के मुख्य बिंदु (की-हाइलाइट्स):

  • ₹2.14 करोड़ की अवैध कमाई: पूरी जांच में कुल 2.14 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित अवैध कमाई (Proceeds of Crime) की पुख्ता पहचान की गई है।

  • अस्थाई कुर्की: ईडी ने इस रैकेट से जुड़ी 2.14 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों (जिसमें आलीशान रिहायशी प्रॉपर्टी और कई बैंक खाते शामिल हैं) को अस्थाई रूप से अटैच और फ्रीज कर दिया है।

  • कंपनियों का काला चिट्ठा: इस काली कमाई में से अकेले रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए 1.37 करोड़ रुपये, ओवरसीज पार्टनर और रुद्र कंसल्टेंसी से 61.60 लाख रुपये तथा इन्फोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन से 15 लाख रुपये की अवैध उगाही का खुलासा हुआ है।

  • दस्तावेजों का जाल: आरोपियों पर जाली शैक्षणिक डिग्रियां, मनगढ़ंत एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट और फर्जी फाइनेंशियल स्टेटमेंट के जरिए अंतरराष्ट्रीय वीजा प्रणाली के साथ खिलवाड़ करने का संगठित अपराध दर्ज किया गया है।