कम तेल, ज्यादा स्वाद! जानिए पौष्टिक खाना बनाने की खास तकनीकें

वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के बीच चल रहे युद्ध और तनावपूर्ण हालातों का सीधा असर अब आम आदमी की थाली पर दिखने लगा है। पहले घरेलू गैस सिलेंडरों के दामों ने परेशान किया और अब खाने के तेल की बढ़ती कीमतें घर का मासिक बजट बिगाड़ रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में समझदारी इसी में है कि रसोई में कुछ ऐसे आसान और कारगर तरीके अपनाए जाएं, जिससे कम से कम तेल का उपयोग करके भी बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन तैयार किया जा सके। इससे पैसों की बचत तो होगी ही, साथ ही परिवार की सेहत भी दुरुस्त रहेगी।

हाल ही में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से अपने दैनिक आहार में चिकनाई और तेल की मात्रा घटाने का आग्रह किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह आदत देश और मानव शरीर दोनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। दरअसल, भारत अपनी आवश्यकता का एक बहुत बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से इंपोर्ट (आयात) करता है, जिसके भुगतान में हर साल देश का विदेशी मुद्रा भंडार भारी मात्रा में खर्च होता है।

वैश्विक संकट के इस दौर में यदि हम सब मिलकर तेल की खपत को नियंत्रित करें, तो यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ हमारी जीवनशैली को भी बेहतर बनाएगा। अत्यधिक तली-भुनी चीजें खाने से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कम तेल में शानदार कुकिंग करने के कुछ बेहतरीन उपाय।

1. नॉन-स्टिक बर्तनों को बनाएं अपनी पहली पसंद

कम घी-तेल में खाना पकाने का सबसे सरल माध्यम आधुनिक नॉन-स्टिक कड़ाही और पैन का इस्तेमाल करना है। साधारण लोहे या एल्युमिनियम के बर्तनों में सब्जी या मसाले को नीचे चिपकने और जलने से बचाने के लिए अत्यधिक तेल डालना पड़ता है। इसके विपरीत, नॉन-स्टिक बर्तनों की विशेष कोटिंग के कारण बहुत ही मामूली या सिर्फ कुछ बूंद तेल में भी भोजन पूरी तरह सुरक्षित और अच्छे से पक जाता है। बाजार में उपलब्ध ऐसे बर्तनों के उपयोग से तेल की मासिक खपत को आधा किया जा सकता है।

2. बोतल से सीधे तेल उड़ेलने की आदत बदलें

अक्सर खाना बनाते समय जल्दबाजी में लोग सीधे कंटेनर या बोतल से कड़ाही में तेल डाल देते हैं, जिससे जरूरत से ज्यादा मात्रा गिर जाती है। इस आदत को बदलकर हमेशा चम्मच (स्पून) या मेजरिंग कप की सहायता से नापकर ही तेल कड़ाही में डालें। यदि परिवार मिलकर यह तय कर ले कि प्रति सप्ताह या प्रति माह रसोई में कितने लीटर तेल का ही उपयोग करना है, तो फिजूलखर्ची और सेहत के नुकसान दोनों को आसानी से रोका जा सकता है। यह छोटी सी आदत शरीर को कम चिकनाई वाले भोजन का आदी बना देती है।

3. मसालों और नेचुरल फ्लेवर्स का सही कॉम्बिनेशन

ज्यादा तेल से स्वाद बढ़ने की धारणा सिर्फ एक मिथक है फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार, व्यंजनों में असली और बेहतरीन स्वाद तेल के तैरने से नहीं, बल्कि मसालों के सही संतुलन और उन्हें पकाने के सही तरीके से आता है। आप अपने भोजन का जायका बढ़ाने के लिए अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, हरा धनिया, पुदीना, कसूरी मेथी और नींबू के रस का सही इस्तेमाल करें। ये प्राकृतिक सामग्रियां भोजन को बिना भारी बनाए उसे अत्यंत स्वादिष्ट और सुगंधित बना देती हैं।

4. डीप-फ्राई के बजाय स्टीमिंग और ग्रिलिंग अपनाएं

पारंपरिक भारतीय रसोइयों में समोसे, कचोरी, पकौड़े और पूरियों जैसे डीप-फ्राई (ज्यादा तेल में तले हुए) व्यंजनों को काफी पसंद किया जाता है, लेकिन यह सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह है। अब समय आ गया है कि खाने को तलने के बजाय उसे भाप में पकाने (स्टीमिंग), उबालने (ब्वॉयलिंग) या ग्रिल करने की आदत डाली जाए। इडली, ढोकला, ग्रिल्ड पनीर, रोस्टेड सब्जियां और उबली हुई दालें स्वाद में भी लाजवाब होती हैं और इनके सेवन से शरीर में अतिरिक्त फैट (वसा) जमा नहीं होता, जिससे पाचन तंत्र भी मजबूत रहता है।

5. कम तेल के इस्तेमाल से शरीर को मिलेंगे अनगिनत फायदे

चिकनाई से दूरी बनाने और संतुलित खान-पान रखने से फिटनेस का स्तर सुधरता है। इससे धमनियों में खराब कोलेस्ट्रॉल जमने की प्रक्रिया रुकती है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा न्यूनतम हो जाता है। हल्का भोजन पेट में आसानी से पचता है, जिससे गैस, अपच और एसिडिटी जैसी रोजमर्रा की समस्याओं से निजात मिलती है। शरीर दिन भर ऊर्जावान महसूस करता है और कम तेल-मसाले के सेवन से चेहरे की त्वचा पर भी प्राकृतिक निखार आता है।

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