पटना। बिहार में जमीन की नापी (मापी) कराने वाले लोगों को अब पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन की नापी के लिए नई शुल्क दरें लागू कर दी हैं। विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत कई मामलों में नापी शुल्क लगभग दोगुना तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही आवेदन से लेकर शुल्क भुगतान और नापी तक की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे लोगों को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध सेवा मिलने की उम्मीद है।
– ग्रामीण क्षेत्रों में इतनी होगी नई शुल्क दर
नई अधिसूचना के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि की सामान्य नापी के लिए प्रति खेसरा 1,000 रुपये शुल्क देना होगा। अधिकतम शुल्क 4,000 रुपये तय किया गया है। इससे पहले सामान्य नापी के लिए अधिकतम 1,000 रुपये ही शुल्क लिया जाता था। वहीं तत्काल (तात्कालिक) नापी की सुविधा लेने पर प्रति खेसरा 2,000 रुपये शुल्क देना होगा और अधिकतम 8,000 रुपये तक भुगतान करना पड़ेगा।
– शहरी क्षेत्रों में और अधिक बढ़ा शुल्क
नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में जमीन की सामान्य नापी के लिए प्रति खेसरा 2,000 रुपये तथा अधिकतम 8,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं तत्काल नापी कराने के लिए प्रति खेसरा 4,000 रुपये और अधिकतम 18,000 रुपये तक शुल्क देना होगा।
– पूरी प्रक्रिया हुई डिजिटल
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन की नापी की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब आवेदन जमा करने, शुल्क भुगतान और नापी से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएंगी। विभाग का कहना है कि इससे लोगों को अंचल कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनेगी।
– दो दिनों में पूरी होगी नापी
नई व्यवस्था के तहत संबंधित अमीन को आवेदन प्राप्त होने के बाद दो दिनों के भीतर जमीन की नापी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होगा और लोगों को समयबद्ध सेवा मिल सकेगी।
– पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन बढ़ेगा आर्थिक बोझ
सरकार का दावा है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से भ्रष्टाचार, अनावश्यक देरी और कार्यालयों की भागदौड़ पर काफी हद तक रोक लगेगी। लोग घर बैठे आवेदन करने और ऑनलाइन शुल्क जमा करने की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। हालांकि, नई शुल्क दरों में हुई बढ़ोतरी से जमीन की नापी कराने वाले लोगों पर पहले की तुलना में अधिक आर्थिक बोझ पड़ेगा। ऐसे में जहां डिजिटल व्यवस्था लोगों को सुविधा देगी, वहीं बढ़े हुए शुल्क को लेकर आम नागरिकों की जेब पर अतिरिक्त असर भी देखने को मिल सकता है।

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