ग्वालियर। शहर के शताब्दीपुरम क्षेत्र में सरकारी भूमि को खाली कराने पहुंची जिला प्रशासन, नगर निगम और विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम को स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। इस पूरी कार्रवाई के दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पुलिस बल को भी बड़ी संख्या में तैनात करना पड़ा।
अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई पर हंगामा
उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए संयुक्त टीम शताब्दीपुरम इलाके में स्थित सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। इस कार्रवाई की भनक लगते ही स्थानीय विधायक अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए और प्रशासनिक अमले की कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया। स्थिति को संभालन के लिए भारी पुलिस बल को तैनात करना पड़ा।
बारिश के मौसम में बेघर होने पर फूटा गुस्सा
अचानक हुई इस तोड़फोड़ और बेदखली की कार्रवाई से करीब दो सौ से अधिक परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए। महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने बारिश के इस मौसम में बेघर किए जाने पर रोष जताते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले उनके विस्थापन की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
जनप्रतिनिधि की चेतावनी और अधिकारियों का रुख
मौके पर पहुंचे विधायक ने प्रशासनिक अधिकारियों पर जमकर गुस्सा निकाला और चेतावनी दी कि यदि इस बरसात में गरीबों को उजाड़ा गया, तो सभी प्रभावितों को सीधे प्राधिकरण कार्यालय ले जाकर अधिकारियों के कक्ष में ठहराया जाएगा। वहीं, प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई वर्ष 2016 से जुड़े भूमि विवाद पर न्यायालय के सख्त आदेशों का पालन करते हुए की जा रही है।
न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रक्रिया का हवाला
प्रशासनिक अधिकारियों और प्राधिकरण के अध्यक्ष का पक्ष है कि जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे लोगों को पहले ही नियमानुसार कई नोटिस दिए जा चुके थे। मामला उच्च न्यायालय में पहुंचने और अदालत के स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद ही यह कानूनी कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ पुलिस बल की मौजूदगी में अमल में लाई गई है।

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