नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव (संचार) एवं राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के प्रथम एवं द्वितीय चरण के अंतर्गत ही लगभग 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित कर दिए गए, जो पूर्ववर्ती मतदाता सूची का करीब 13 प्रतिशत है।
विभिन्न चरणों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का दावा
जयराम रमेश द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी विस्तृत वक्तव्य के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग ने जून 2025 में बिहार से एसआईआर के प्रथम चरण की शुरुआत की थी। इसके उपरांत नवंबर 2025 में 9 राज्यों एवं 3 केंद्र शासित प्रदेशों में द्वितीय चरण संचालित किया गया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के मध्य में 16 राज्यों तथा 3 केंद्र शासित प्रदेशों में तृतीय चरण प्रारंभ हुआ। इस चरण में 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के प्राप्त आंकड़ों के आधार पर नामांकित 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ लोगों के नाम सूची से पृथक कर दिए गए हैं, जो कुल पंजीकृत मतदाताओं का 17 प्रतिशत से अधिक है।
5.43 करोड़ मतदाताओं को अतिरिक्त नोटिस जारी होने की बात
कांग्रेस नेता ने रेखांकित किया कि नाम विलोपन के अतिरिक्त 5.43 करोड़ से अधिक मतदाताओं को नोटिस प्रेषित कर अपना नाम सूची में यथावत रखने हेतु पूरक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रशासनिक प्रक्रिया से 15 प्रतिशत अतिरिक्त मतदाताओं के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि व्यापक स्तर पर नाम हटाने की कार्रवाई के पश्चात भी इतनी विशाल संख्या में मतदाताओं का सत्यापन लंबित रहना प्रक्रियात्मक विसंगतियों की ओर संकेत करता है।
लगभग 32 प्रतिशत मतदाताओं के प्रभावित होने का आकलन
जयराम रमेश के अनुसार, विलोपित नामों तथा संभावित खतरे वाले प्रकरणों को सम्मिलित करने पर देश के लगभग 32 प्रतिशत मतदाता इस प्रक्रिया से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। इसका तात्पर्य यह है कि प्रत्येक तीन में से औसतन एक मतदाता का नाम या तो मतदाता सूची से निष्कासित कर दिया गया है अथवा उस पर निरसन की तलवार लटक रही है।
विभिन्न राज्यों में प्रभाव का ब्योरा
कांग्रेस महासचिव ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि दिल्ली में 53.73 प्रतिशत, चंडीगढ़ में 52.58 प्रतिशत, तेलंगाना में 48.90 प्रतिशत, झारखंड में 39.57 प्रतिशत, हरियाणा में 37.50 प्रतिशत, उत्तराखंड में 35.71 प्रतिशत, मेघालय में 35.36 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 33.88 प्रतिशत, कर्नाटक में 27.60 प्रतिशत, ओडिशा में 23.67 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 21.17 प्रतिशत एवं पंजाब में 15.23 प्रतिशत मतदाता प्रभावित हो रहे हैं।
संभावित निष्कासित मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करने का विषय
उन्होंने जानकारी दी कि कर्नाटक, तेलंगाना एवं झारखंड जैसे राज्यों में प्रभावित मतदाताओं की सूचियां सार्वजनिक की गई हैं ताकि वे समय रहते अपना सत्यापन पूर्ण करा सकें। दिल्ली में जनदबाव के उपरांत 19 सितंबर 2026 को यह सूची जारी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सहित कई अन्य राज्यों में अब तक ऐसी पारदर्शी सूची जनसामान्य हेतु उपलब्ध नहीं कराई गई है।
वंचित वर्ग एवं महिला मतदाताओं पर अधिक प्रभाव का आरोप
जयराम रमेश ने दावा किया कि मतदाता सूचियों से निष्कासित किए गए अधिकांश नागरिक सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े एवं वंचित वर्गों से आते हैं। इसके अतिरिक्त, अधिकांश बड़े राज्यों में पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम अधिक संख्या में काटे गए हैं।
प्रशासनिक जटिलताओं और संवैधानिक सिद्धांतों पर सवाल
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एसआईआर के माध्यम से नागरिकों पर जटिल दस्तावेज प्रस्तुत करने का अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने संपूर्ण प्रक्रिया की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध बताया और कहा कि यह प्रक्रिया आम जनता के मताधिकार को प्रभावित कर रही है।

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