कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। राज्य के सियासी गलियारों में यह अटकलें तेज हैं कि टीएमसी में बड़ी टूट हो सकती है और ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह (सिंबल) दोनों निकल सकते हैं। इस बीच टीएमसी के बागी गुट ने दावा किया है कि अगले एक-दो दिनों में उनके पास पर्याप्त विधायक हो जाएंगे, जिससे वे विधानसभा में एक अलग समूह बनाकर खुद को 'असली तृणमूल कांग्रेस' घोषित करने का दावा पेश कर सकेंगे।
महाराष्ट्र की तर्ज पर बंगाल में बड़े उलटफेर की तैयारी
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार में मंत्री तापस रॉय ने दावा किया है कि महाराष्ट्र की तरह बंगाल में भी बहुत जल्द एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि टीएमसी के बागी विधायक लगातार विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के संपर्क में हैं। बागी गुट के नेताओं का मानना है कि वे महाराष्ट्र में शिवसेना के घटनाक्रम की तर्ज पर आगे बढ़ रहे हैं, जहां एकनाथ शिंदे ने विधायकों के बड़े समर्थन के साथ अलग गुट बनाकर अंततः पार्टी का नाम और सिंबल हासिल कर लिया था।
TMC ने दो विधायकों को पार्टी से निकाला
पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत को देखते हुए टीएमसी ने हाल ही में अपने दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निष्कासन के बावजूद ऋतब्रत बनर्जी लगातार बागी विधायकों के हस्ताक्षर जुटाने के अभियान में लगे हुए हैं। कानूनी रूप से दल-बदल कानून की कार्रवाई से बचने के लिए बागी गुट को पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायकों का साथ चाहिए होगा।
बागी गुट को दलबदल कानून से बचने के लिए चाहिए 52 विधायक
हालिया विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने 80 सीटों पर जीत हासिल की थी। दो विधायकों के निष्कासन के बाद अब विधानसभा में पार्टी के कुल विधायकों की संख्या 78 रह गई है। ऐसे में कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए बागी गुट को कम से कम 52 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। यदि बागी गुट यह जादुई आंकड़ा जुटा लेता है, तो विधानसभा अध्यक्ष उन्हें तृणमूल कांग्रेस विधायक दल का वैध प्रतिनिधि मान सकते हैं।
बुधवार या गुरुवार को आ सकता है सियासी भूचाल
बागी गुट के सूत्रों का कहना है कि 50 से अधिक विधायक एक साथ विधानसभा पहुंचकर स्पीकर को अपना समर्थन पत्र सौंप सकते हैं, जिसके लिए बुधवार या गुरुवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी बीच, ऋतब्रत बनर्जी ने भी हावड़ा जिले के सभी तृणमूल विधायकों से बुधवार सुबह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल होने की अपील कर बड़े संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद ये सभी विधायक सीधे विधानसभा का रुख कर सकते हैं।
जावेद अहमद खान के आरोपों से गहराया संकट
सोमवार रात से ही टीएमसी के कई पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के बागी गुट में शामिल होने की खबरें आ रही हैं, जिनमें कसबा से विधायक जावेद अहमद खान का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। जावेद अहमद खान ने मंगलवार को खुलकर पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर अब लोकतंत्र पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि सभी महत्वपूर्ण फैसले पहले से ही तय कर लिए जाते हैं और बैठकों में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है। उनके इस बयान के बाद टीएमसी का आंतरिक संकट और ज्यादा गहरा गया है।

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