September 12, 2026

ईरान-सऊदी की दुश्मनी के बीच भारत का डिप्लोमेसी मास्टरस्ट्रोक, सुबह 4 बजे तक चला मंथन

नई दिल्ली| अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि हासिल की है। मैराथन वार्ताओं के दौर के पश्चात भारत ने ब्रिक्स (BRICS) संगठन के साझा घोषणा-पत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति कायम कर ली है। शनिवार तड़के तक निरंतर चली गहन बैठकों के बाद इस संयुक्त बयान को अंतिम रूप दिया जा सका।

यह सफलता इस दृष्टिकोण से बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे राष्ट्र शामिल हैं, जिनके मध्य विभिन्न क्षेत्रीय तथा वैश्विक विषयों पर गहरे नीतिगत मतभेद विद्यमान रहे हैं।

वैश्विक तनाव के बीच मध्यस्थ की भूमिका

पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत ने भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण वाले देशों को एक मंच पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए। भारत ने यह सुनिश्चित करने में मुख्य भूमिका निभाई कि आपसी मतभेदों के कारण साझा घोषणा-पत्र पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वार्ता के दौरान कई जटिल विषयों पर सदस्यों के विचार भिन्न थे। भारत ने सतत संवाद के माध्यम से इन भिन्नताओं के बीच संतुलन स्थापित किया, जिससे एक ऐसा सर्वमान्य ढांचा तैयार हो सका जिसे सभी देशों ने सहर्ष स्वीकार किया।

कूटनीतिक सफलता के मुख्य कारण

वार्ता में शामिल सूत्रों ने स्पष्ट किया कि कई विवादित मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। भारत का मुख्य ध्यान सहमति के बिंदुओं को उभारने और ब्रिक्स की प्रक्रिया को साझा हितों तक सीमित रखने पर केंद्रित रहा।

  • विविधताओं में संतुलन: क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों को एक साझा घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर के लिए सहमत करना भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।

  • सार्थक वार्ता का दौर: कई घंटों तक चले विचार-विमर्श से यह स्पष्ट हुआ कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर विभिन्न विचारधाराओं के मध्य तालमेल बिठाना कितना चुनौतीपूर्ण कार्य था।

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करते हुए भारत ने इस बहुपक्षीय मंच के माध्यम से पारस्परिक सहयोग को नई गति दी है। 12 और 13 सितंबर को आयोजित इस शिखर सम्मेलन में विश्व के प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ प्रतिनिधि सहभागिता कर रहे हैं, जहां भारत ने अपनी कुशल मध्यस्थता का लोहा मनवाया है।