वर्ल्ड डेस्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के 81वें सत्र के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र के समक्ष कड़ा रुख अपनाते हुए दो टूक कहा है कि संस्थाओं को किसी भी तरह के राजनीतिक प्रभाव और पक्षपात से पूरी तरह मुक्त होकर कार्य करना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों से जुड़े मामलों की समीक्षा करते समय संबंधित देशों की विशिष्ट सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमियों को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक है।
सत्र का मुख्य उद्देश्य और भारत का पक्ष
मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट पर विचार करने के लिए आयोजित इस सत्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने देश का आधिकारिक बयान रखा। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय के साथ परस्पर भरोसे और सहयोगात्मक भावना को आगे बढ़ाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। साथ ही, यह उम्मीद भी जताई गई कि मानवाधिकार संस्थाएं राजनीतिक उठापटक और चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति से ऊपर उठकर वैश्विक स्तर पर एक निष्पक्ष और नैतिक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगी।
दिल्ली के प्रदर्शनों पर टिप्पणी से असहमत
यह कड़ा कूटनीतिक बयान ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिन पहले नई दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की एक टिप्पणी पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी। भारत सरकार ने उस टिप्पणी को देश के आंतरिक मामलों में अनुचित और अस्वीकार्य हस्तक्षेप करार दिया था। दरअसल, उक्त कार्यालय ने राजधानी में हुए प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों और वकीलों आदि को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी, जिसके बाद भारत ने अपनी संप्रभुता के मामलों में बाहरी बयानों पर नाराजगी जाहिर की थी।
भारत का सामाजिक-आर्थिक विकास मॉडल
भारतीय प्रतिनिधि ने देश की प्राचीन सभ्यतागत परंपराओं, विविधता के सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत प्रत्येक नागरिक की गरिमा की रक्षा करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। पिछले एक दशक में देश की विकासात्मक उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया गया कि इस दौरान 25 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी के दायरे से बाहर आए हैं। इसके अलावा, एक अरब से अधिक लोगों तक विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है, जिसमें करीब 80 करोड़ नागरिकों को मुफ्त खाद्यान्न और लगभग 60 करोड़ लोगों को निशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा का प्रावधान शामिल है। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी लगभग 32 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं।
मानवाधिकार परिषद का नया कार्यकाल और आदिवासी अधिकारों पर आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकार परिषद के वर्ष 2027 से 2029 तक के नए कार्यकाल के लिए 15 नए सदस्य देशों का चयन किया है, जिनमें ब्राजील, जर्मनी, जापान, नेपाल और यूक्रेन समेत कई देश शामिल हैं। इस बीच, भारत ने आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़ी एक अन्य रिपोर्ट में देश के संदर्भ का उल्लेख किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। भारत ने स्पष्ट किया कि वन अधिकार अधिनियम व्यक्तिगत और सामूहिक अधिकारों को मान्यता देता है, और बिना किसी ठोस आधिकारिक आंकड़े के केवल एक व्यक्ति की जानकारी के आधार पर रिपोर्ट में दावे को शामिल करना इसकी निष्पक्षता और गंभीरता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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